सरायकेला-खरसावां जिले में आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पुलिस ने वर्ष 2025 में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आपात हालात में त्वरित मदद पहुंचाने वाली इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) यानी डायल 112 के तहत पुलिस की प्रतिक्रिया समय में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है। अब संकट की स्थिति में पुलिस टीम औसतन 10 मिनट से भी कम समय में मौके पर पहुंच रही है।
डायल 112 को बनाया गया और प्रभावी
डायल 112 एक अखिल भारतीय आपात सेवा है, जिसके जरिए पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाएं एक ही कॉल पर उपलब्ध कराई जाती हैं। सरायकेला-खरसावां पुलिस ने इस व्यवस्था को जमीन पर और मजबूत बनाने के लिए तकनीकी निगरानी, बेहतर संसाधन प्रबंधन और फील्ड स्तर पर सक्रियता पर खास जोर दिया।
21 मिनट से 9 मिनट तक का बड़ा बदलाव
साल 2025 की शुरुआत में जिले में डायल 112 का औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 21 मिनट के आसपास था। लेकिन निरंतर समीक्षा, बेहतर समन्वय और पुलिसकर्मियों की तत्परता के चलते नवंबर 2025 तक यह घटकर मात्र 9 मिनट 19 सेकंड रह गया। यह बदलाव पुलिस की कार्यसंस्कृति में आए सकारात्मक सुधार को दर्शाता है।
महीने-दर-महीने कैसा रहा प्रदर्शन
जनवरी 2025 में 346 आपात कॉल्स पर औसत रिस्पॉन्स टाइम 20 मिनट 48 सेकंड रहा।
फरवरी में 332 घटनाओं में यह समय लगभग 20 मिनट 49 सेकंड दर्ज किया गया।
मार्च में 362 इवेंट्स के साथ समय घटकर 17 मिनट 59 सेकंड हो गया।
अप्रैल में 312 मामलों पर औसत रिस्पॉन्स टाइम 21 मिनट 21 सेकंड रहा।
मई में 272 इवेंट्स पर पुलिस 17 मिनट 31 सेकंड में पहुंची।
जून में 332 घटनाओं में यह समय और घटकर 14 मिनट 9 सेकंड हो गया।
जुलाई में 416 कॉल्स पर रिस्पॉन्स टाइम 12 मिनट 40 सेकंड दर्ज किया गया।
अगस्त में 412 मामलों में पुलिस 12 मिनट 9 सेकंड में मौके पर पहुंची।
सितंबर में 446 इवेंट्स के दौरान औसत समय 13 मिनट 43 सेकंड रहा।
अक्टूबर में 487 घटनाओं पर यह समय 13 मिनट 34 सेकंड दर्ज किया गया।
नवंबर 2025 में 428 इवेंट्स के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 9 मिनट 19 सेकंड का न्यूनतम रिस्पॉन्स टाइम हासिल किया गया।
आपात स्थितियों में कुछ मिनट भी जीवन और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। डायल 112 के तहत रिस्पॉन्स टाइम को 20 मिनट से घटाकर एकल अंक में लाना सरायकेला-खरसावां पुलिस की सतत मेहनत और प्रतिबद्धता का नतीजा है। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इस समयसीमा को और कम किया जाए, ताकि संकट में फंसे नागरिकों को और तेज तथा प्रभावी सहायता मिल सके।