साहिबगंज नगर परिषद की राजनीति में एक बार फिर झामुमो के केंद्रीय समिति सदस्य और प्रवक्ता पंकज मिश्रा की भूमिका अहम साबित हुई है। अध्यक्ष पद पर रामनाथ पासवान उर्फ छोटू पासवान की बड़ी जीत के बाद अब उपाध्यक्ष पद पर भी सहमति बन गई है। वार्ड संख्या एक की पार्षद विनीता कुमारी का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है।
विनीता कुमारी कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं और इससे पहले भी नगर परिषद की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। बताया जा रहा है कि उनके नाम का प्रस्ताव कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पंकज मिश्रा के समक्ष रखा था, जिस पर सकारात्मक सहमति बनी। संताल परगना की राजनीति में पंकज मिश्रा का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का करीबी भी माना जाता है। नगर निकाय चुनाव के दौरान उन्होंने झामुमो समर्थित प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी।
रविवार को नवनिर्वाचित वार्ड पार्षदों को सम्मानित करने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी मंच पर उपाध्यक्ष पद को लेकर चर्चा भी हुई। कुल 28 में से 25 पार्षद कार्यक्रम में शामिल हुए। बैठक के दौरान मौजूद सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से विनीता कुमारी के नाम पर समर्थन जताया। उल्लेखनीय है कि विनीता कुमारी लगातार तीसरी बार वार्ड पार्षद निर्वाचित हुई हैं।
राज्यभर में नगर निकायों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण समारोह 12 मार्च को आयोजित किया जाएगा। साहिबगंज जिले के तीन निकाय (साहिबगंज नगर परिषद, राजमहल नगर पंचायत और बरहड़वा नगर पंचायत) के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए गए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार, सिदो-कान्हू सभागार और पंचायती भवन सभागार में कार्यक्रम आयोजित होंगे।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त हेमंत सती संबंधित निकायों के अध्यक्षों को शपथ दिलाएंगे, जबकि वार्ड पार्षदों को उनके-अपने आरओ शपथ ग्रहण कराएंगे। शपथ समारोह के दिन ही उपाध्यक्ष पद का चयन भी किया जाएगा। यदि पार्षदों के बीच आम सहमति बनती है तो निर्विरोध चुनाव होगा, अन्यथा मतदान की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
उपाध्यक्ष के चयन के बाद संबंधित आरओ विजयी उम्मीदवार को प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे और नगर निकाय अध्यक्ष उन्हें शपथ दिलाएंगे। प्रशासन ने शपथ ग्रहण समारोह को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस बीच मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता स्वतः समाप्त हो चुकी है और अब किसी प्रकार की चुनावी पाबंदी लागू नहीं है।