झारखंड में वोटर लिस्ट की होगी छंटनी? 63 लाख वोटरों का होगा सत्यापन

झारखंड में वोटर लिस्ट की होगी छंटनी? 63 लाख वोटरों का होगा सत्यापन

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। 5 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल 63,24,116 मतदाताओं का निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) स्तर पर सत्यापन किया जाएगा। इन मतदाताओं को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। हालांकि, जांच पूरी होने तक इन सभी के नाम ड्राफ्ट सूची में बने रहेंगे।

ड्राफ्ट मतदाता सूची के मुताबिक राज्य में इस समय कुल 2,21,01,249 मतदाता दर्ज हैं। सत्यापन के लिए चिन्हित मतदाताओं में सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिनके रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इस श्रेणी में 45,55,227 मतदाता हैं। इनके अलावा 14,03,205 मतदाता ऐसे हैं, जिनका पिछली सूची से कोई मैपिंग रिकॉर्ड नहीं मिला है। वहीं डेमोग्राफिकल सीमिलर एंट्री (DSE) के आधार पर 3,65,684 मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।

तार्किक विसंगति वाले मामलों में ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिनके वर्तमान और पुराने रिकॉर्ड में नाम तो मेल खाते हैं, लेकिन नाम, माता-पिता के नाम या जन्मतिथि में अंतर पाया गया है। इसके अलावा एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में दर्ज होने की स्थिति भी सत्यापन का आधार बनेगी।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत ऐसे सभी मामलों में संबंधित मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाएगा।

सुनवाई के बिना नहीं कटेगा किसी का नाम

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी श्रेणी में शामिल होने के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। नो-मैपिंग और तार्किक विसंगति वाले प्रत्येक मामले की ERO स्तर पर सुनवाई होगी।

मतदाताओं को नियमानुसार नोटिस देकर आवश्यक प्रमाण मांगे जाएंगे। उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद ही सक्षम अधिकारी कारण सहित आदेश जारी करेंगे। इसके बाद ही किसी नाम को हटाने अथवा बनाए रखने पर निर्णय होगा।

उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निर्वाचन आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की जाएगी।

ज्यादा मामलों वाले क्षेत्रों में बढ़ेंगे अधिकारी

SIR के तहत ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद शुरू हुई दावा-आपत्ति प्रक्रिया की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने गुरुवार को समीक्षा की। निर्वाचन सदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में लंबित दावों और आपत्तियों का जल्द निपटारा करने पर जोर दिया गया।

जिन विधानसभा क्षेत्रों में दावा-आपत्ति के मामले अधिक हैं, वहां अतिरिक्त सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जिलों से सक्षम अधिकारियों की सूची तत्काल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को भेजने का निर्देश दिया गया है।

पहली बार नहीं आए तो दूसरी बार मिलेगा नोटिस

सत्यापन के लिए चिन्हित मतदाताओं को लिखित नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस में निर्धारित तारीख पर संबंधित सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी के समक्ष दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा जाएगा।

यदि कोई मतदाता पहले नोटिस के बावजूद निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसे दूसरी बार नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संबंधित अधिकारी निर्णय ले सकेंगे।

मतदाताओं को अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। पूरी जांच और सत्यापन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

ड्राफ्ट सूची में नाम अभी बरकरार

खास बात यह है कि सत्यापन के दायरे में आए सभी 63,24,116 मतदाताओं के नाम 5 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में फिलहाल मौजूद हैं। यदि संबंधित मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, तो अंतिम मतदाता सूची तैयार होने के समय उनके नाम हटाए जा सकते हैं।

इससे पहले ड्राफ्ट सूची तैयार करते समय मौजूदा मतदाता सूची से 43,61,987 नाम हटाए जा चुके हैं। अब शेष मामलों में नोटिस, सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।