कहां गयी रांची झील की 36 एकड़ ज़मीन? दस्तावेजों में 53 एकड़, मौके पर सिर्फ 17 एकड़ का जलक्षेत्र

कहां गयी रांची झील की 36 एकड़ ज़मीन? दस्तावेजों में 53 एकड़, मौके पर सिर्फ 17 एकड़ का जलक्षेत्र

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 22, 2025, 1:57:00 PM

रांची की पहचान मानी जाने वाली रांची झील, जिसे स्वामी विवेकानंद सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। नगर निगम के दस्तावेजों में जहां झील और उसके आसपास की कुल 53 एकड़ जमीन निगम के स्वामित्व में दर्ज है, वहीं भौतिक रूप से तालाब का जलक्षेत्र अब केवल 17 एकड़ में सिमट कर रह गया है। शेष 36 एकड़ जमीन के अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस विसंगति का खुलासा तब हुआ जब रांची नगर निगम ने अपनी जमीन और परिसंपत्तियों को अद्यतन करने के साथ डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि बड़ा तालाब, जिसे कभी विशाल जलस्रोत के रूप में जाना जाता था, अब काफी सीमित क्षेत्र में बचा है। चूंकि यह हिस्सा जलस्रोत के रूप में संरक्षित है, इसलिए अतिक्रमण से अब तक बचा रहा, जबकि आसपास की निगम भूमि पर समय के साथ अवैध कब्जे होते चले गए।

अधिकारियों के मुताबिक, तालाब के चारों ओर फैली निगम की जमीन पर भवन निर्माण समेत विभिन्न तरह के अतिक्रमण किए गए हैं। जैसे ही यह स्थिति स्पष्ट हुई, नगर निगम प्रशासन सक्रिय हो गया और पूरे क्षेत्र की गहन जांच की योजना बनाई गई है।

इतिहास पर नजर डालें तो बड़ा तालाब करीब 180 वर्ष पूर्व लगभग 52 एकड़ क्षेत्र में खुदवाया गया था। वर्ष 1845 में कुंवर श्रीनाथ द्वारा तालाब के एक किनारे पक्के घाट का निर्माण भी कराया गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि दशकों के दौरान तालाब की 36 एकड़ जमीन आखिर कहां चली गई।

नगर निगम ने इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए तालाब के आसपास फैले पूरे 53 एकड़ क्षेत्र की विस्तृत मापी कराने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया में ड्रोन सर्वे और आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा, ताकि अवैध कब्जों की सटीक पहचान हो सके और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति सामने आए।

जांच का रोडमैप

  • सोमवार से तालाब क्षेत्र के आसपास मौजूद सभी निर्माणों की वैधता की सूक्ष्म जांच शुरू होगी

  • निगम के अपर प्रशासक के नेतृत्व में गठित विशेष टीम अभियान चलाएगी

  • अतिक्रमण पाए जाने पर अनाधिकृत वाद दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी

  • इस संबंध में प्रशासक ने अधिकारियों के साथ बैठक भी की है

उल्लेखनीय है कि लाल नवल किशोर नाथ शाहदेव द्वारा रांची नगर निगम को तालाब और उससे जुड़ी जमीन लीज पर उपलब्ध कराई गई थी। अब नगर निगम इस ऐतिहासिक धरोहर की जमीन को सुरक्षित करने और अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी में है।