गोंदलपुरा कोल ब्लॉक पर जनसुनवाई से पहले भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, प्रशासन को पीछे खींचने पड़े कदम

गोंदलपुरा कोल ब्लॉक पर जनसुनवाई से पहले भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, प्रशासन को पीछे खींचने पड़े कदम

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 20, 2026, 2:25:00 PM

निजी कोयला कंपनी से जुड़ी प्रस्तावित परियोजना को लेकर मंगलवार को स्थानीय फुटबॉल मैदान में आयोजित जनसुनवाई उस समय हंगामे और हिंसा में बदल गई, जब दो गुटों के बीच झड़प हो गई। यह जनसुनवाई झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित की गई थी, लेकिन अचानक हुई हिंसक घटना के चलते पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, जनसुनवाई का विरोध कर रहे कुछ समूह ट्रैक्टरों पर सवार होकर बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। बताया जाता है कि वे भाले, तीर, हसुआ जैसे पारंपरिक और धारदार हथियारों से लैस थे। कई लोगों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए मास्क, मफलर और हेलमेट पहन रखे थे। आरोप है कि सुनियोजित ढंग से वे पंडाल के भीतर घुसे और वहां मौजूद रैयतों व ग्रामीणों पर हमला कर दिया।

हिंसा के दौरान महिलाएं भी इसकी चपेट में आईं, जिससे पूरे परिसर में अफरातफरी और चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावरों का उद्देश्य जनसुनवाई की वैधानिक प्रक्रिया को किसी भी तरह विफल करना था।

घटना के दौरान पंडाल और आयोजन स्थल में जमकर तोड़-फोड़ की गई। सैकड़ों कुर्सियां क्षतिग्रस्त कर दी गईं और अन्य व्यवस्थाएं भी बुरी तरह नष्ट हो गईं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस हिंसा में लाखों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।

हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक रौशन लाल चौधरी और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और शांति बनाए रखने की अपील की।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कोयला कारोबार, बालू तस्करी और अवैध ईंट-भट्ठों का संचालन होता रहा है। उनका कहना है कि इन्हीं अवैध गतिविधियों से जुड़े असामाजिक तत्व विकास से जुड़ी परियोजनाओं का विरोध करते हुए हिंसा का सहारा लेते हैं, जिससे इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है।