विज्ञान, तकनीक और संकल्प से भारत ने दुनिया में बनाई पहचान: संतोष गंगवार

विज्ञान, तकनीक और संकल्प से भारत ने दुनिया में बनाई पहचान: संतोष गंगवार

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 11, 2026, 6:50:00 PM

रांची स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (IICM) में आयोजित “सस्टेनेबल माइनिंग एंड इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश को अब केवल खनिज उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार और टिकाऊ खनन मॉडल विकसित करने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक विकास और प्रकृति संरक्षण को साथ लेकर चलना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस कार्यक्रम का आयोजन विज्ञान भारती के नेतृत्व में कोल इंडिया लिमिटेड, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों के सहयोग से किया गया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दिन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता की भावना का प्रतीक है। उन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया था।

गंगवार ने कहा कि परमाणु परीक्षणों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चुनौतियां और प्रतिबंध सामने आए, लेकिन भारत ने दबाव में आने के बजाय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय संकल्प जब एक दिशा में काम करते हैं, तब देश असाधारण उपलब्धियां हासिल करता है।

अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए राज्यपाल भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें अटल सरकार में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा बनने का अवसर मिला था। उन्होंने 1984 के चुनाव अभियान की एक स्मृति साझा करते हुए बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने बरेली में उनके समर्थन में एक ही दिन में कई जनसभाएं की थीं।

राज्यपाल ने झारखंड की खनिज संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और यूरेनियम जैसे संसाधनों से समृद्ध है, जिनका देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के दौर में खनन गतिविधियों को अधिक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये आने वाली पीढ़ियों की साझा विरासत हैं। उनके अनुसार, देश को ऐसा विकास मॉडल अपनाना चाहिए जिसमें उद्योगों की प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट (LiFE)” संदेश का भी उल्लेख किया और कहा कि यह अभियान विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ें, ताकि विज्ञान का लाभ आम लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।