आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण यूपीएससी की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी बीच में छोड़ने वाले प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के लिए झारखंड सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति-अनुसूचित जाति सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत अब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) उत्तीर्ण करने वाले पात्र छात्रों को मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी के लिए 1.50 लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के उन मेधावी अभ्यर्थियों को आर्थिक सहयोग देना है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सिविल सेवा में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। सरकार का मानना है कि यह सहायता राशि प्रतियोगी छात्रों को बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराएगी।
योजना का लाभ केवल झारखंड के स्थायी निवासी अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलेगा। इसके लिए आवेदक के परिवार की सभी स्रोतों से वार्षिक आय 8 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। यह आर्थिक सहायता प्रत्येक पात्र अभ्यर्थी को केवल एक बार ही उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा, जो छात्र पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य कोचिंग अथवा प्रोत्साहन योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, वे इस योजना के तहत आवेदन करने के पात्र नहीं होंगे।
आवेदन के साथ अभ्यर्थी को अपनी शैक्षणिक योग्यता से संबंधित प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, आवासीय प्रमाण-पत्र तथा आय प्रमाण-पत्र की स्व-अभिप्रमाणित प्रतियां जमा करनी होंगी। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि आवासीय, जाति और आय प्रमाण-पत्र ऑनलाइन जारी किए गए हों तथा इन्हें अंचलाधिकारी या उससे उच्च स्तर के सक्षम अधिकारी द्वारा निर्गत किया गया हो। ऑफलाइन या पुराने प्रमाण-पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इसके साथ ही यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का प्रवेश पत्र तथा प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने का आधिकारिक प्रमाण भी आवेदन के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा।
इच्छुक अभ्यर्थियों को अपना आवेदन 31 जुलाई, शाम 6:00 बजे तक आदिवासी कल्याण आयुक्त कार्यालय, कल्याण कॉम्प्लेक्स, मोराबादी में जमा करना होगा। आवेदन स्पीड पोस्ट, निबंधित डाक अथवा कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर जमा किए जा सकते हैं।
सरकार की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली एससी-एसटी अभ्यर्थियों के लिए सिविल सेवा की तैयारी को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।