झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को HEC की जमीनों के कथित अवैध हस्तांतरण का मामला जोरदार तरीके से उठा। खिजरी के विधायक राजेश कच्छप ने आरोप लगाया कि कई ऐसे भूखंड, जहां पहले से निर्माण हो चुका है, उनका दोबारा रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। इससे इलाके में रहने वाले लोगों में असुरक्षा और भ्रम की स्थिति बन गई है।
विधायक ने कहा कि जिन जमीनों का मालिकाना हक स्पष्ट नहीं है, उनकी भी लगान रसीदें ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जारी हो रही हैं, जबकि संबंधित अंचल कार्यालयों में उन जमीनों का कोई विधिवत रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन न किसी जमींदार की है और न ही किसी अन्य निजी व्यक्ति की, तो फिर राजस्व रसीद किस आधार पर काटी जा रही है।
भू-राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कच्छप ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की और कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संगठित गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने स्वीकार किया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें अनियमितताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।