झारखंड में सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा की उम्मीद लगाए बैठे सरकारी कर्मचारियों के लिए ई-पेंशन प्रणाली ने एक दोहरी तस्वीर पेश की है। एक ओर डिजिटल प्रक्रिया ने बड़ी संख्या में कर्मियों को समय पर पेंशन भुगतान आदेश (PPO) जारी कर राहत दी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक प्रक्रियाओं और दस्तावेजी कमियों के कारण कई मामलों में देरी भी सामने आ रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 66,915 कर्मचारियों के पीपीओ सफलतापूर्वक तैयार किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि ऑनलाइन प्रणाली ने पेंशन प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हजारों सेवानिवृत्त कर्मियों को समय पर आर्थिक सहारा मिला है।
हालांकि, सभी मामलों में स्थिति इतनी सहज नहीं है। बड़ी संख्या में आवेदन अभी भी विभिन्न स्तरों पर अटके हुए हैं। महालेखाकार (AG) कार्यालय में 3,358 प्रकरण लंबित हैं, जबकि हाल के दिनों में 1,573 नए आवेदन वहां भेजे गए हैं, जिससे लंबित मामलों का दबाव और बढ़ा है।
इसके अलावा, कई आवेदन विभागीय स्तर पर भी अटके हुए हैं। करीब 2,750 प्रकरण आहरण एवं वितरण पदाधिकारियों (DDO) के पास लंबित हैं, जबकि 1,083 आवेदन स्वीकृति देने वाले प्राधिकारियों के पास प्रक्रिया में हैं। इन स्तरों पर देरी से पूरी प्रणाली की गति प्रभावित हो रही है।
तकनीकी त्रुटियां और अधूरी जानकारी भी एक बड़ी बाधा बनकर उभरी हैं। लगभग 600 से अधिक आवेदनों को सुधार के लिए वापस संबंधित कर्मचारियों को लौटाया गया है। इन मामलों में दस्तावेजों की कमी या डेटा एंट्री में गड़बड़ी के कारण प्रक्रिया को दोबारा शुरू करना पड़ रहा है।