झारखंड के विभिन्न जिलों में सामने आए बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले की जांच निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। मामले की पड़ताल कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने सोमवार को सात आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब किया। यह पूछताछ रांची स्थित सीआईडी मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जारी है।
जांच एजेंसियों का प्रमुख फोकस इस बात का पता लगाना है कि कथित रूप से अवैध तरीके से निकाली गई बड़ी राशि का उपयोग किन माध्यमों में किया गया और उसे कहां-कहां लगाया गया। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन की परतें खुलने से घोटाले के नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी सभी सात आरोपियों से लगातार दो दिनों तक विस्तृत पूछताछ करेगी। जांच के दौरान वित्तीय दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों से विभिन्न पहलुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। आरोपियों को कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम से निपटने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह मामला सरकारी खजाने से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की निकासी से संबंधित है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरे प्रकरण में विभागीय कर्मचारियों और बाहरी तत्वों के बीच समन्वय के जरिए सुनियोजित तरीके से गड़बड़ियां की गईं।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज हो गई है। पुलिस और आर्थिक अपराध से जुड़ी एजेंसियां इस कथित नेटवर्क की पूरी संरचना को समझने और उससे जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल में जुटी हैं।
जांच अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान हुई और आगे की पूछताछ से कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे घोटाले में शामिल अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों, अधिकारियों और संभावित सहयोगियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। फिलहाल, एसआईटी सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।