तीन दिवसीय पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव की शुरुआत, जनजातीय साहित्य की समृद्ध परंपरा पर केंद्रित रहा पहला दिन

तीन दिवसीय पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव की शुरुआत, जनजातीय साहित्य की समृद्ध परंपरा पर केंद्रित रहा पहला दिन

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 10, 2026, 10:34:00 AM

पूर्वी सिंहभूम जिले में आयोजित पहले साहित्य उत्सव का उद्घाटन गोपाल मैदान में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों, जनजातीय रचनाकारों और स्थानीय लेखकों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन के पहले दिन विशेष रूप से झारखंड के जनजातीय साहित्य पर विमर्श केंद्र में रहा।

उद्घाटन सत्र में महादेव टोप्पो, डॉ पार्वती तिर्की, डॉ अनुज लुगुन, रवींद्रनाथ मुर्मू, जोबा मुर्मू, डॉ नारायण उरांव, देवेंद्र नाथ चांपिया, जेरी पिंटो समेत अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने सहभागिता की। झारखंड के अलावा अन्य राज्यों से आए लेखकों, कलाकारों और चिंतकों ने साहित्य, समाज और संस्कृति से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए उप विकास आयुक्त नागेंद्र पासवान ने कहा कि इस उत्सव का उद्देश्य साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत करना तथा युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने मुख्यमंत्री झारखंड का संदेश भी पढ़कर सुनाया, जिसमें कोल्हान क्षेत्र की भाषाओं और साहित्य को राष्ट्रीय पहचान मिलने की आशा व्यक्त की गई। साथ ही राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों, विशेषकर सोबरन मांझी पुस्तकालयों की स्थापना का उल्लेख किया गया।

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि यह आयोजन साहित्यकारों और पाठकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मंच रचनात्मक विचार-विमर्श और सांस्कृतिक समृद्धि को नई दिशा देगा।

जनजातीय साहित्य की वैश्विक दृष्टि पर मंथन

पहले बौद्धिक सत्र में राष्ट्रीय साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित डॉ पार्वती तिर्की और डॉ अनुज लुगुन ने “झारखंड आदिवासी भाषा साहित्य की विश्व दृष्टि” विषय पर विचार रखे। डॉ तिर्की ने कहा कि आदिवासी साहित्य की जड़ें वाचिक और लिखित दोनों परंपराओं में हैं, जहां सामूहिक सृजन और सामाजिक सहभागिता प्रमुख तत्व हैं। वहीं डॉ लुगुन ने आदिवासी साहित्य में निहित उपनिवेश-विरोधी चेतना को रेखांकित करते हुए इसके वैश्विक संदर्भों पर समुचित मूल्यांकन की आवश्यकता बताई।

इतिहास, भाषा और लिपि पर संवाद

दूसरे सत्र में “आदिवासी इतिहास का अध्याय” विषय पर चर्चा हुई। डोगरो बिरुली ने साहित्य को जीवंत समाज की पहचान बताया। वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रो. डी. एन. चांपिया ने आदिवासी भाषाओं की प्राचीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक भाषाओं की तुलना में जनजातीय भाषाओं का इतिहास कहीं अधिक पुराना और प्रकृति-आधारित है।

तीसरे सत्र में “A Good Life: Lessons in Living and Leaving” विषय पर अक्षय बाहिबाला और लेखक जेरी पिंटो के बीच संवाद हुआ। इस दौरान पैलियेटिव केयर के इतिहास, वर्तमान स्थिति और इसके विस्तार की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

चौथे सत्र में ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष के अवसर पर जोबा मुर्मू, रानी मुर्मू, रविंद्र मुर्मू और वीर प्रताप मुर्मू ने गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के योगदान और ओलचिकी लिपि के विकास पर विचार साझा किए।

मातृभाषा संरक्षण पर जोर

पांचवें सत्र में कुडुख भाषा के संरक्षण से जुड़े डॉ नारायण उरांव ने कहा कि भाषा के बिना संस्कृति का अस्तित्व संभव नहीं है। उन्होंने स्कूलों में मातृभाषा में शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कुडुख भाषा और इसकी तोलोंग सिकि लिपि के विकासक्रम की जानकारी दी।

छठे सत्र में साहित्यकार जयनंदन और अजय मेहताब के बीच “मजदूरों के शहर में साहित्य की पौध” विषय पर संवाद हुआ। जयनंदन ने शहर के साहित्यिक योगदान, प्रमुख रचनाकारों और अपनी लेखन यात्रा के अनुभव साझा किए, साथ ही नाट्यकर्मियों की समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया।

दास्तान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा समापन

अंतिम सत्र में डॉ हिमांशु वाजपेयी और प्रज्ञा शर्मा ने रानी लक्ष्मीबाई की वीर गाथा को दास्तानगोई शैली में प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। देर शाम कस्तूरबा विद्यालय सहित विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

उत्सव के पहले दिन का समापन स्थानीय साहित्यकारों की कवि गोष्ठी के साथ हुआ। आयोजन की सफलता में एसडीओ धालभूम अर्नव मिश्रा, डीटीओ धनंजय, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पंचानन उरांव, जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष पांडेय सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की अहम भूमिका रही। बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों के साथ वरीय पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक और अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।