उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी, भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली ज़मानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर न्यायिक व्यवस्था की मर्यादा को सुरक्षित रखा है।
राजेश ठाकुर के अनुसार, यह किसी को धन्यवाद देने का विषय नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानून के अनुसार किया गया आवश्यक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि हाल के समय में आए कुछ न्यायिक फैसलों से अदालतों की साख पर सवाल उठने लगे थे और ऐसे में यह आदेश न्यायपालिका में भरोसा बनाए रखने के लिए अहम साबित हुआ है।
कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ज़मानत पर रोक लगाना ही पर्याप्त कदम नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि जिन लोगों ने ऐसे फैसलों को प्रभावित करने या दिलाने में भूमिका निभाई, उनके खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक पीड़िता को संपूर्ण न्याय मिलना संभव नहीं है।
राजेश ठाकुर ने आगे कहा कि यह मामला पूरे देश के लिए एक गंभीर संदेश है। सत्ता की ताकत और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर अपराधियों को राहत दिलाने की कोशिशें संविधान और न्याय की बुनियादी भावना के विपरीत हैं और ऐसी हर कोशिश का कड़ा विरोध होना चाहिए।