विधानसभा में स्वर्णरेखा परियोजना और कृषि निर्यात का मुद्दा गरमाया, केंद्र से सहयोग की मांग

विधानसभा में स्वर्णरेखा परियोजना और कृषि निर्यात का मुद्दा गरमाया, केंद्र से सहयोग की मांग

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 12, 2026, 2:12:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन सदन में स्वर्णरेखा बहुउद्देश्यीय परियोजना की प्रगति और राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के मुद्दे प्रमुख रूप से उठे। सदस्यों ने परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सदन में विधायक सरयू राय के सवाल को उठाते हुए जनार्दन पासवान ने सरकार से पूछा कि लंबे समय से लंबित स्वर्णरेखा परियोजना आखिर कब तक पूरी होगी। इस पर जल संसाधन मंत्री हफीजुल अंसारी ने जवाब देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार 616 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करा दे तो परियोजना का कार्य पूरा किया जा सकता है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व में भाजपा के शासन के दौरान इस परियोजना के साथ राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाया गया और इसके काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण भी परियोजना प्रभावित हुई है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि आवश्यक संसाधन मिलने पर अगले एक से डेढ़ वर्ष के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार हर वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए बजट आवंटित करती रही है।

कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रस्ताव

इसी दौरान गांडेय से विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष पहल करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि झारखंड में फल, सब्जी और वन उत्पादों के लिए एक वैश्विक स्तर का बाजार विकसित किया जाए और राज्य में एग्रो-फूड हब की स्थापना की जाए।

उन्होंने कहा कि झारखंड में आम, टमाटर, अदरक, हल्दी, शहद, तसर, कटहल और औषधीय पौधों जैसे उत्पादों की बड़ी संभावनाएं हैं, जिन्हें निर्यात के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजने की जरूरत है। विधायक ने बताया कि हरित ग्राम योजना के तहत लगभग डेढ़ लाख एकड़ क्षेत्र में फलदार पौधे लगाए गए हैं और शिमला मिर्च की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

कल्पना मुर्मू सोरेन ने यह भी सुझाव दिया कि रांची और देवघर जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं। इससे कृषि और वन उत्पादों की गुणवत्ता की जांच कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन दिया जा सकेगा, जिससे निर्यात की प्रक्रिया आसान होगी।

केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव खारिज

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि पैकेजिंग लैब स्थापित करने का प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस विषय पर फिर से केंद्र से बातचीत करेगी और जरूरत पड़ने पर दिल्ली जाकर मामले को उठाया जाएगा।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि झारखंड में 4400 से अधिक लैम्प्स और पैक्स मौजूद हैं, जिनमें से करीब 700 से 800 सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य आपूर्ति विभाग आपसी समन्वय के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में आगे काम करेंगे।