झारखंड हाईकोर्ट ने चतरा जिले में एक 19 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने के मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस पर कड़ा रुख अपनाया है। छात्र को लावालौंग और टंडवा थाना पुलिस द्वारा हिरासत में रखे जाने के कारण उसकी मैट्रिक परीक्षा छूट जाने की बात सामने आई है, जिस पर अदालत ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई।
इस मामले की सुनवाई छात्र की मां द्वारा दाखिल हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर हुई। सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ में हुई।
पहले चरण की सुनवाई के दौरान चतरा डीएसपी, लावालौंग और टंडवा थाना प्रभारी अदालत में उपस्थित हुए। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जब कोर्ट ने उन्हें बुलाया ही नहीं था तो वे अदालत क्यों आए। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब वे आए हैं तो केस डायरी साथ क्यों नहीं लाए।
अदालत ने पुलिस अधिकारियों से यह भी जानना चाहा कि 26 और 27 जनवरी की रात करीब दो बजे छात्र को उसके घर से क्यों उठाया गया। कोर्ट ने पूछा कि पूछताछ के बाद उसे तुरंत रिहा क्यों नहीं किया गया और आखिर उसे 10 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि टंडवा थाना में कांड संख्या 26/2026 दर्ज है। अदालत ने पूछा कि यदि इसी मामले में छात्र से पूछताछ की गई थी तो क्या इसका उल्लेख केस डायरी में दर्ज है। डीएसपी ने बताया कि स्टेशन डायरी में इसका उल्लेख मौजूद है।
इसके बाद खंडपीठ ने चतरा एसपी को मोबाइल फोन के जरिए वर्चुअल रूप से पेश किया और उनसे सीधा सवाल किया कि क्या केस डायरी में छात्र को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने का कोई रिकॉर्ड दर्ज है या नहीं।
अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए चतरा डीएसपी, टंडवा और लावालौंग थाना प्रभारी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए। साथ ही तीनों अधिकारियों को कोर्ट में ही बैठने का निर्देश दिया गया।
इसके बाद अदालत ने दोपहर एक बजे पुनः सुनवाई तय की और चतरा एसपी को केस डायरी के साथ वर्चुअल रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। दोपहर की सुनवाई में एसपी ने केस डायरी का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि छात्र से 27 जनवरी और 30 जनवरी को पूछताछ की गई थी।
अदालत ने अगली सुनवाई में मामले के अनुसंधानकर्ता को केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके बाद डीएसपी और दोनों थाना प्रभारियों के जब्त मोबाइल लौटा दिए गए, लेकिन उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया।
मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तिथि तय की गई है।
इस प्रकरण में छात्र की मां ने अपने बेटे को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बिपिन बिहारी, भास्कर त्रिवेदी और प्रियांश निलेश ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने अदालत में जवाब पेश किया।