झारखंड हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मनोज टंडन की जब्त की गई कार को बिना विलंब थाने से मुक्त करने का निर्देश दिया है। जस्टिस गौतम चौधरी की पीठ ने गुरुवार को टंडन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
दरअसल, पिछले सप्ताह रांची सिविल कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी ने भी वाहन रिलीज करने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद कार थाने में ही खड़ी रही। इसी को लेकर अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और तत्काल वाहन सुपुर्दगी की मांग की।
पूरा विवाद एक मामूली सड़क दुर्घटना से शुरू हुआ था, जब मनोज टंडन की कार और एक मोटरसाइकिल के बीच हल्की टक्कर हो गई थी। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले ने उस समय काफी तूल पकड़ा और कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टंडन के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि आगे की जांच अदालत की अनुमति के बिना नहीं की जा सकेगी। आदेश के बाद अब संबंधित थाना को कार तत्काल छोड़ने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।