झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने दुमका स्थित राजकीय मूक-बधिर आवासीय विद्यालय का दौरा कर विद्यार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं और उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी ली। राज्यपाल ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा और क्षमताएं समाज के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि विशेष जरूरत वाले बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार, समाज, विद्यालय और सरकार के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने कहा कि पढ़ाई या विद्यालय से जुड़ी किसी भी आवश्यकता और समस्या को उनके संज्ञान में लाया जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनके स्तर से जो संभव होगा, वह सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी और कहा कि उचित अवसर और सकारात्मक माहौल मिलने पर वे अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से सामने ला सकते हैं।
संवाद के दौरान राज्यपाल ने अपने गृह क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि वह उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि बरेली में भी मूक-बधिर विद्यार्थियों के लिए विद्यालय संचालित होता है और वहां के शिक्षकों से उनका संपर्क रहा है। उन्होंने इस अनुभव के आधार पर विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण की अहमियत पर जोर दिया।
राज्यपाल ने विद्यालय के विभिन्न हिस्सों का जायजा भी लिया। उन्होंने कक्षाओं और कंप्यूटर लैब का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के प्रति समाज की सोच समान अवसर, सम्मान और सहयोग पर आधारित होनी चाहिए। ऐसा वातावरण तैयार करने की जरूरत है, जहां विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को पहचान सकें, आत्मविश्वास विकसित कर सकें और अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ें।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों के बीच विभिन्न परिसंपत्तियों का वितरण किया। इसके साथ ही वृद्धजनों को सम्मानित भी किया गया। राज्यपाल ने समाज के लोगों से अपील की कि वे विशेष जरूरत वाले बच्चों को प्रोत्साहित करें और उनकी शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास में सहयोगी की भूमिका निभाएं।