पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए केंद्र ने खोला खजाना, 15वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त जारी

पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए केंद्र ने खोला खजाना, 15वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त जारी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 24, 2026, 3:22:00 PM

झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत राज्य को 412.68 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसे वित्तीय वर्ष 2024-25 की दूसरी किस्त के रूप में जारी किया जा रहा है। यह अनुदान ‘टाइड ग्रांट’ के रूप में दिया गया है, जिसका उपयोग निर्धारित क्षेत्रों में ही किया जाएगा।

इस फंड का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर की संस्थाओं (ग्राम पंचायत, प्रखंड पंचायत और जिला परिषद) को मजबूत बनाना और ग्रामीण ढांचे में सुधार लाना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 4,345 ग्राम पंचायतों में से 4,342 को इस सहायता का लाभ मिलेगा, जबकि 264 में से 253 प्रखंड पंचायतों को इसमें शामिल किया गया है। इसके अलावा सभी 24 जिला परिषदों को इस योजना के तहत धनराशि प्राप्त होगी।

धन के वितरण को लेकर केंद्र ने स्पष्ट मानक तय किए हैं। राशि का आवंटन 2011 की जनगणना और भौगोलिक क्षेत्रफल को आधार बनाकर किया जाएगा। यदि राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो उसी के अनुरूप वितरण किया जाएगा, अन्यथा जनसंख्या और क्षेत्रफल के 90:10 अनुपात को अपनाया जाएगा। यह व्यवस्था संसाधनों के संतुलित और पारदर्शी वितरण को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि यह राशि बिना किसी कटौती के संबंधित निकायों तक समय पर पहुंचाई जाए। इसके लिए 10 कार्य दिवस की समयसीमा तय की गई है। यदि इस अवधि में राशि हस्तांतरित नहीं होती है, तो राज्य को ब्याज सहित भुगतान करना पड़ सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य कार्यान्वयन में देरी को रोकना है।

चूंकि यह ‘टाइड ग्रांट’ है, इसलिए इसके उपयोग पर स्पष्ट सीमाएं निर्धारित हैं। कुल राशि का लगभग आधा हिस्सा स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा, जबकि शेष राशि पेयजल आपूर्ति से संबंधित परियोजनाओं में लगेगी। हालांकि, स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीमित स्तर पर बदलाव की गुंजाइश रखी गई है।

इस वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई और पेयजल सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। गांवों में जलापूर्ति योजनाओं, नल-जल परियोजनाओं और कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायतों को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।