टेंडर कमीशन घोटाला: ईडी की पांचवीं चार्जशीट में 12 और इंजीनियर नामजद, 3% कमीशन नेटवर्क का खुलासा

टेंडर कमीशन घोटाला: ईडी की पांचवीं चार्जशीट में 12 और इंजीनियर नामजद, 3% कमीशन नेटवर्क का खुलासा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 19, 2026, 10:13:00 AM

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े बहुचर्चित टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा और बढ़ाते हुए पांचवीं पूरक चार्जशीट दाखिल की है। इस नई चार्जशीट में विभाग से जुड़े 12 और इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया है, जिससे इस मामले में कुल आरोपितों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।

ईडी की जांच में यह सामने आया है कि लगभग 3048 करोड़ रुपये के टेंडर कार्यों के निष्पादन के दौरान 90 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। यह रकम कथित तौर पर तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, विभागीय शीर्ष अधिकारियों और विभिन्न स्तर के इंजीनियरों के बीच बांटी गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, विभाग के भीतर एक सुनियोजित कमीशन तंत्र सक्रिय था, जिसके तहत ठेकेदारों से टेंडर दिलाने के बदले तय दर पर वसूली की जाती थी। कुल टेंडर मूल्य का करीब 3 प्रतिशत ‘कमीशन’ के रूप में लिया जाता था, जिसे पदानुक्रम के आधार पर वितरित किया जाता था। इसमें लगभग 1.35 प्रतिशत हिस्सा मंत्री तक उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से पहुंचाया जाता था, जबकि शेष राशि सचिव और इंजीनियरिंग स्तर के अधिकारियों में बांटी जाती थी।

17 मार्च को रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में दायर इस पूरक चार्जशीट में कई वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अभियंताओं के नाम शामिल हैं। इनमें पूर्व मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जिन पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और अवैध वसूली में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप हैं।

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ईडी के मुताबिक, ये अधिकारी न केवल कमीशन वसूलने में शामिल थे, बल्कि उसे व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा कर उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का काम भी करते थे। ये सभी विभिन्न समय पर ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र और झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से जुड़े रहे हैं।

जांच के दौरान ईडी ने झारखंड, बिहार और दिल्ली में कुल 52 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस मामले में अब तक नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सहयोगी जहांगीर आलम फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

वित्तीय अनियमितताओं के तहत एजेंसी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर चुकी है, जिसे संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके अलावा विभिन्न ठिकानों से करीब 38 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इनमें संजीव कुमार लाल के परिसरों से 32.20 करोड़ रुपये और एक ठेकेदार के यहां से लगभग 2.93 करोड़ रुपये शामिल हैं। साथ ही आठ महंगी गाड़ियों को भी जब्त किया गया है।

इस पूरे मामले की शुरुआत एसीबी जमशेदपुर में दर्ज एक मामले से हुई थी, जिसमें एक जूनियर इंजीनियर को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। उसी जांच के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता के ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, जिसने इस बड़े घोटाले की परतें खोल दीं।

ईडी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई और इसे विभिन्न माध्यमों से संपत्तियों में निवेश किया गया। मामले में पहले ही एक मुख्य और चार पूरक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं, जिन पर अदालत संज्ञान ले चुकी है।