टाटा सब-लीज विवाद में आया नया मोड़, हाईकोर्ट से LPA खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुँची राज्य सरकार

टाटा सब-लीज विवाद में आया नया मोड़, हाईकोर्ट से LPA खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुँची राज्य सरकार

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 02, 2025, 11:42:00 AM

टाटा सब-लीज मामले में झारखंड सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट द्वारा दायर LPA को खारिज किए जाने के बाद सरकार ने शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है और जल्द सुनवाई होने की संभावना है। पूरा मामला Ashiana Housing Ltd. और Parikh Inn Pvt. Ltd. से जुड़ा है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

राज्य सरकार की सहमति के आधार पर TATA STEEL LTD ने उक्त कंपनियों के साथ जमीन का सब-लीज एग्रीमेंट किया था। इसके बाद जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) ने इस सब-लीज भूमि पर निर्माण की मंजूरी भी दे दी थी। लेकिन इसके बाद उपायुक्त ने आदेश जारी करके सब-लीज की स्थिति को यथास्थिति में रखने को कहा और रजिस्ट्री की प्रक्रिया रोक दी।

मामला पहुँचा हाईकोर्ट

उपायुक्त के इस आदेश के खिलाफ मामला हाईकोर्ट गया। अदालत के समक्ष मुख्य प्रश्न यह था कि क्या सरकार अपनी पूर्व सहमति के बाद किए गए सब-लीज समझौते को रद्द कर सकती है, खासकर तब जब बाद में सरकार ने अपनी बनाई समिति को ही नियमों के विरुद्ध घोषित कर दिया हो।

न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने 29 सितंबर 2023 के निर्णय में सरकार के तर्कों को अस्वीकार करते हुए Ashiana Housing और Parikh Inn के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने TATA STEEL को दोनों कंपनियों के साथ रजिस्टर्ड सब-लीज करने का निर्देश दिया और JNAC को संशोधित भवन योजना (रिवाइज्ड बिल्डिंग प्लान) मंजूर करने को कहा।

LPA दायर करने में देरी और हाईकोर्ट की नाराजगी

राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ LPA तो दायर किया, लेकिन निर्धारित समय सीमा से काफी विलंब के बाद। सरकार ने देरी की वजह देते हुए कहा कि—

  • फैसले की जानकारी विभागों के बीच देर से पहुँची,

  • फाइलें एक विभाग से दूसरे तक जाने में समय लगा,

  • और उपायुक्त जनवरी से जून 2024 तक मतदाता सूची पुनरीक्षण में व्यस्त थे।

लेकिन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्रन और न्यायाधीश दीपक रौशन की खंडपीठ ने इन तर्कों को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची का काम बाकी महत्वपूर्ण कार्यों को ठप करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने LPA को खारिज कर दिया।

सरकार ने कहा—सब-लीज प्रक्रिया में खामियां थीं

सरकार ने अपने शपथ पत्रों में यह भी तर्क दिया कि—

  • TATA Lease agreement की धारा 8 के तहत गठित समिति विधिसम्मत नहीं थी,

  • तीन अलग-अलग समितियों की रिपोर्टों में अंतर है,

  • सब-लीज की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से नहीं की गई,

  • जमीन की कीमत और लीज शर्तों से राजस्व का नुकसान हुआ है,

  • और Bihar Land Reforms Act के अनुसार सब-लीज, लीज की तरह ही माना जाता है, इसलिए प्रक्रिया समान होनी चाहिए।

सरकार का दावा था कि चूंकि भूमि का मालिकाना हक राज्य सरकार का है, इसलिए टाटा स्टील केवल लीजधारी होने के नाते मनमाने ढंग से सब-लीज नहीं दे सकता।

अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँच चुका है और सभी पक्षों को शीर्ष अदालत की सुनवाई का इंतजार है।