सूचना आयुक्त नियुक्ति पर सस्पेंस बरकरार, राज्य सरकार को मिल सकता है पुनर्विचार का संकेत

सूचना आयुक्त नियुक्ति पर सस्पेंस बरकरार, राज्य सरकार को मिल सकता है पुनर्विचार का संकेत

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 09, 2026, 6:00:00 PM

राज्य में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर भेजे गए प्रस्ताव पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। राज्य सरकार द्वारा लोक भवन को भेजे गए इस प्रस्ताव पर 11 दिन बीत जाने के बावजूद राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिल सकी है। न तो प्रस्ताव को वापस किया गया है और न ही उस पर सहमति जताई गई है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

इस मामले की शुरुआत 25 मार्च को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित चयन समिति की बैठक से हुई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और मंत्री हफीजुल हसन भी शामिल हुए थे। हालांकि उस दिन संभावित नामों पर एकमत राय नहीं बन पाई थी। इसके बाद अगले दिन हुई एक अनौपचारिक चर्चा में सहमति बनने के पश्चात राज्य सरकार ने चयनित नामों का प्रस्ताव राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेज दिया।

सूत्रों के मुताबिक जिन नामों की अनुशंसा की गई है, उनमें वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो से जुड़े तनुज खत्री, भाजपा के शशिभूषण पाठक, कांग्रेस के अमूल्य नीरज खलखो और धर्मवीर सिन्हा शामिल हैं। हालांकि इन नामों में कई ऐसे लोग हैं जिनकी सक्रिय राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

राजभवन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रस्ताव में राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों के शामिल होने के कारण इस पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। राज्यपाल कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, नाम सार्वजनिक होने के बाद कई व्यक्तियों और संगठनों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इन आपत्तियों में सूचना का अधिकार अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की बात कही गई है, विशेष रूप से उन नामों को लेकर जो सीधे राजनीतिक दलों से जुड़े हैं।

कुछ प्रस्तावित उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामलों का हवाला भी आपत्तियों में दिया गया है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। यही वजह है कि लोक भवन किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की पूरी तरह जांच करना चाहता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्यपाल बिना किसी नाम को सीधे खारिज किए, नियमों और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर राज्य सरकार को प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की सलाह दे सकते हैं। फिलहाल, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय का इंतजार जारी है।