झारखंड की वर्ष 2015 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने उन 888 अभ्यर्थियों को राहत दी है, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरण सफलतापूर्वक पार किए थे, लेकिन अंतिम चयन सूची में स्थान नहीं मिलने के कारण नियुक्ति से वंचित रह गए थे।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को निर्देश दिया है कि इन उम्मीदवारों के मामलों पर पुनर्विचार किया जाए। इसके लिए भर्ती विज्ञापन में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में आवश्यक छूट देने का भी आदेश दिया गया है।
यह मामला जेएसएससी द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 04/2015 के तहत आयोजित कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षाओं के साथ-साथ शारीरिक दक्षता और चिकित्सीय परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया था। दस्तावेजों की जांच में भी वे योग्य पाए गए थे। इसके बावजूद मई 2017 में घोषित अंतिम परिणाम में उनका चयन नहीं हो सका।
अभ्यर्थियों का दावा था कि महिला और होमगार्ड श्रेणी में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पद खाली रह गए थे। भर्ती नियमों के अनुसार होमगार्ड कोटे की रिक्त सीटों को अन्य पात्र उम्मीदवारों से भरा जा सकता था। इसी आधार पर उम्मीदवारों ने पहले झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां राहत नहीं मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इन 888 अभ्यर्थियों की पात्रता का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। इसके लिए उनका दोबारा शारीरिक दक्षता और मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि समय बीतने और अभ्यर्थियों की वर्तमान आयु को ध्यान में रखते हुए उन मानकों में आवश्यक रियायत दी जा सकती है, जो उम्र से प्रभावित होते हैं। हालांकि ऐसे मापदंड, जिन पर उम्र का असर नहीं पड़ता, उनमें कोई छूट नहीं दी जाएगी।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पुनः आयोजित प्रक्रिया में अभ्यर्थी सफल पाए जाते हैं, तो उन्हें वर्तमान में कार्यरत कांस्टेबलों की वरिष्ठता सूची के अंतिम हिस्से में रखा जाएगा। हालांकि इन 888 उम्मीदवारों के बीच आपसी वरिष्ठता का निर्धारण वर्ष 2015 की मूल मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत केवल उन 888 उम्मीदवारों तक सीमित रहेगी, जिनके नाम 27 मई 2026 तक उपलब्ध रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसके बाद किसी नए दावेदार या आवेदन को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड पुलिस में वर्तमान समय में कांस्टेबल के 2,380 पद रिक्त हैं। इनमें 1,168 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि 1,212 पद सामान्य रूप से भरे जा सकते हैं।
अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को आदेश के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट 13 जुलाई 2026 तक प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जहां इस आदेश के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।