टेंडर से जुड़े कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बचाव पक्ष की दलीलों को आंशिक रूप से सुनने के बाद उनकी जमानत याचिका पर तत्काल फैसला देने से इनकार कर दिया।
जस्टिस एम एम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की पीठ ने मामले में आगे की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए अभियोजन पक्ष को अहम गवाहों के बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इसके लिए कोर्ट ने चार सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद इस मामले पर अगली सुनवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 11 जुलाई को आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
ईडी ने आलमगीर आलम को पिछले वर्ष 15 मई को गिरफ्तार किया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उनके करीबी सहयोगियों (निजी सचिव संजीव कुमार लाल और घरेलू सहायक जहांगीर आलम) के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करीब 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसी बरामदगी को आधार बनाकर एजेंसी ने मामले में गिरफ्तारी की कार्रवाई की थी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले में गवाहों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया तेज होगी, जो आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।