सिल्ली पॉलिटेक्निक की राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल बोले-तकनीक और नवाचार से ही बनेगा भविष्य

सिल्ली पॉलिटेक्निक की राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल बोले-तकनीक और नवाचार से ही बनेगा भविष्य

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 20, 2026, 1:52:00 PM

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा है कि बदलते दौर में विज्ञान और तकनीक समाज की दिशा तय कर रहे हैं तथा ऑटोमेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी आधुनिक प्रणालियां जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में वही आगे बढ़ेंगे, जो तकनीकी बदलावों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे।

राज्यपाल बुधवार को सिल्ली पॉलिटेक्निक द्वारा आयोजित “नेशनल हैंड्स-ऑन वर्कशॉप ऑन इंडस्ट्री ओरिएंटेड ऑटोमेशन एंड IoT सिस्टम्स (IAOT-26)” के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने तकनीकी शिक्षा को व्यवहारिक प्रशिक्षण और नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि केवल सैद्धांतिक पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा, रिसर्च और प्रैक्टिकल एक्सपोजर के जरिए सीखने का अवसर मिलना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और डिजिटल सिस्टम्स का विस्तार तेजी से हो रहा है, इसलिए युवाओं को इन क्षेत्रों में दक्ष बनाना समय की मांग है।

हाल में आयोजित एआई समिट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व करने की क्षमता मौजूद है। उनके अनुसार, देश में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है और झारखंड भी युवा ऊर्जा से भरपूर राज्य है। जरूरत इस बात की है कि छात्रों को सही मार्गदर्शन, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी कौशल हासिल करने वाले युवा केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नए अवसर और रोजगार भी पैदा कर सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की “डिजिटल इंडिया”, “स्किल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश तकनीक आधारित विकास मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि लगातार अपने ज्ञान और तकनीकी क्षमता को विकसित करते रहें। वहीं शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से उन्होंने वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए उपयोगी साबित होगी तथा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद करेगी।