रिम्स जमीन घोटाला से जुड़े फर्जी दस्तावेज मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों ने मांगी बेल

रिम्स जमीन घोटाला से जुड़े फर्जी दस्तावेज मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों ने मांगी बेल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 12, 2026, 12:47:00 PM

रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) की अधिग्रहित जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक ने रांची स्थित एसीबी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई निर्धारित की गई है।

यह मामला करीब सात एकड़ सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फर्जी वंशावली और नकली कागजात तैयार कर रिम्स की अधिग्रहित भूमि को निजी जमीन बताकर बेचने की साजिश रची गई। इस प्रकरण में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जांच तेज करते हुए पिछले महीने चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसी के मुताबिक गिरफ्तार लोगों में कार्तिक बड़ाइक, राजकिशोर बड़ाइक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा शामिल हैं। एसीबी का दावा है कि इन लोगों ने जाली दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के स्वामित्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। मामले में कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। अब तक 16 अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि वर्ष 1964-65 में अधिग्रहित की गई रिम्स की जमीन को भू-माफियाओं ने फर्जी कागजात के आधार पर बिल्डरों को बेच दिया। इस कथित सौदे की कीमत लगभग 31 लाख रुपये बताई जा रही है।

पूरे मामले को लेकर एसीबी ने कांड संख्या 1/2026 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन हस्तांतरण के इस नेटवर्क में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही और सरकारी रिकॉर्ड में किस स्तर पर हेरफेर किया गया।