झारखंड में बारिश का रेड अलर्ट! इन 12 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी

झारखंड में बारिश का रेड अलर्ट! इन 12 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी

झारखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने 6 अगस्त को राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला-खरसावां जिलों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही पूरे राज्य में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और कई इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।

7 अगस्त को भी मौसम का यही रुख जारी रहने की संभावना है। पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, गुमला तथा खूंटी जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। वहीं झारखंड के अन्य हिस्सों में भी तेज हवा और वज्रपात की स्थिति बनी रह सकती है।

हालांकि 8 से 10 अगस्त के बीच अत्यधिक बारिश की संभावना कम बताई गई है, लेकिन इस अवधि में भी राज्य के अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना बनी रहेगी।

बीते 24 घंटों के मौसम पर नजर डालें तो राज्य के लगभग सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। सबसे अधिक 110 मिलीमीटर वर्षा जामताड़ा जिले के फतेहपुर में रिकॉर्ड की गई। इसके बाद रामगढ़ और पतरातू में 92-92 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। तापमान की बात करें तो बहरागोड़ा राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो राज्य में सबसे कम रहा।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं होगा। इसके बाद आगामी दो दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचें। वज्रपात और तेज हवा की स्थिति में सुरक्षित भवन या आश्रय स्थल में रहना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।