झारखंड में बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे जारी होने के बाद अब विद्यार्थियों का ध्यान उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले की ओर है, लेकिन रांची विश्वविद्यालय में अब तक स्नातक और इंटर स्तर की नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं होने से छात्र असमंजस में हैं। राज्य के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में शामिल रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन फिलहाल नई शिक्षा नीति (NEP) और प्रस्तावित क्लस्टर सिस्टम पर अंतिम दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार कर रहा है।
इस अनिश्चितता का सीधा असर उन लाखों विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने हाल ही में JAC, CBSE और ICSE बोर्ड की परीक्षाएं पास की हैं। झारखंड एकेडमिक काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में चार लाख से अधिक छात्र सफल हुए हैं, जबकि इंटरमीडिएट के तीनों संकायों; आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स को मिलाकर लगभग तीन लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों पर प्रवेश का दबाव काफी बढ़ गया है।
रांची विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में स्नातक स्तर पर करीब 45 हजार सीटें उपलब्ध हैं। हर साल राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छात्र यहां दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। बावजूद इसके, इस बार प्रवेश प्रक्रिया की तारीखों को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी कारण चांसलर पोर्टल भी अब तक सक्रिय नहीं किया गया है, जिसके माध्यम से पिछले वर्षों में ऑनलाइन आवेदन लिए जाते रहे हैं।
दरअसल, मौजूदा स्थिति की सबसे बड़ी वजह नई शिक्षा नीति और क्लस्टर सिस्टम के बीच संतुलन बनाने की चुनौती मानी जा रही है। NEP जहां बहुविषयक अध्ययन और लचीले कोर्स ढांचे को बढ़ावा देती है, वहीं क्लस्टर मॉडल के तहत कॉलेजों को सीमित विषय संरचना में व्यवस्थित करने की योजना पर काम चल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने दोनों व्यवस्थाओं को एक साथ लागू करने का व्यावहारिक सवाल खड़ा हो गया है।
दाखिले में हो रही देरी से छात्रों और अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्र कॉलेजों और विश्वविद्यालय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि आवेदन प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी मिल सके। आवास व्यवस्था, दस्तावेज सत्यापन और विषय चयन जैसे मुद्दे भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक कैलेंडर पहले से ही पीछे चल रहा है। यदि प्रवेश प्रक्रिया में और देरी होती है तो इसका असर आगामी सत्र, परीक्षाओं और प्रतियोगी तैयारी पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को जल्द नीति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के बीच बनी अनिश्चितता खत्म हो सके।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रबंधन का दावा है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा। संकेत मिल रहे हैं कि इस वर्ष भी ऑनलाइन मोड के जरिए आवेदन आमंत्रित किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए औपचारिक मंजूरी का इंतजार जारी है।