झारखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और आगामी तीन दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 21 जुलाई के लिए रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग के अनुसार बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है।
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिले के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा कई स्थानों पर गरज के साथ बारिश, वज्रपात तथा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
बुधवार को भी राज्य में मानसून सक्रिय बना रहेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। दक्षिणी झारखंड के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। वहीं उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी जिलों में भी कहीं-कहीं बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। हालांकि इस दिन भारी बारिश की अलग से चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन तेज हवा और वज्रपात का खतरा बना रहेगा।
गुरुवार को भी मौसम का रुख लगभग इसी तरह रहने की संभावना है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज सहित उत्तर-पूर्वी जिलों के अलावा मध्य और दक्षिणी झारखंड के कई इलाकों में भी वर्षा होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इस दिन भी गरज-चमक, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है।
मानसून सक्रिय होने के बावजूद राज्य में अब तक वर्षा का आंकड़ा सामान्य स्तर से काफी नीचे है। 1 जून से 20 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में औसतन 391.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि वास्तविक वर्षापात केवल 261.4 मिलीमीटर दर्ज किया गया। इस प्रकार राज्य में अब तक करीब 33 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों, जलाशयों के जलस्तर और भूजल भंडार पर पड़ सकता है। ऐसे में आगामी दिनों की वर्षा कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।