उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में रांची पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना सहित 164 गिरफ्तार

उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में रांची पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना सहित 164 गिरफ्तार

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 13, 2026, 10:05:00 AM

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा 2023 से जुड़े कथित पेपर लीक और सॉल्वर गिरोह के मामले में रांची पुलिस ने व्यापक अभियान चलाते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस संगठित नेटवर्क के मास्टरमाइंड समेत कुल 164 लोगों को हिरासत में लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में 5 सदस्य गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी 159 परीक्षार्थी हैं, जिनमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं। दरअसल, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि तमाड़ थाना क्षेत्र में स्थित एक अधूरा भवन संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को इकट्ठा किया गया है। सूचना मिलते ही एक विशेष टीम गठित की गई और देर रात मौके पर छापेमारी की गई।

जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। कई लोग मौके से भागने लगे, जबकि कुछ अपने पास रखी सामग्री को नष्ट करने या छिपाने का प्रयास करते दिखे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी को काबू में लिया और उन्हें भवन के कमरों में सीमित कर तलाशी शुरू की।

तलाशी के दौरान पुलिस को कई संदिग्ध वस्तुएं मिलीं, जिनमें प्रिंटर, तैयार प्रश्न-उत्तर सामग्री, फटे हुए एडमिट कार्ड, मोबाइल फोन और बैंक से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों को पहले से तैयार सवाल-जवाब रटवाए जा रहे थे।

मोटी रकम लेकर परीक्षा पास कराने का दावा

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के एजेंट अभ्यर्थियों से 10 से 15 लाख रुपये तक वसूलते थे। इसके बदले परीक्षा में सफलता की गारंटी दी जाती थी। कई उम्मीदवारों ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए अपने मोबाइल और प्रवेश पत्र गिरोह के पास ही जमा कर दिए थे। कुछ ने भुगतान के लिए बैंक चेक भी दिए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने JSSC के साथ समन्वय स्थापित कर तमाड़ थाना में 12 अप्रैल 2026 को कांड संख्या 21/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। छापेमारी के दौरान 8 वाहनों को भी कब्जे में लिया गया है। इन वाहनों के उपयोग और मालिकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सरगना का है आपराधिक रिकॉर्ड

इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक अतुल वत्स बताया जा रहा है, जो बिहार के जहानाबाद जिले का निवासी है। पुलिस के अनुसार, वह पहले भी कई बड़े भर्ती घोटालों में शामिल रह चुका है। उसका नाम राजस्थान क्लर्क भर्ती (2017), NEET पेपर लीक (2024), बिहार में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती (2024), यूपी RO/ARO परीक्षा (2024) और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती (2024) जैसे मामलों में सामने आ चुका है। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, डिजिटल डेटा और अन्य संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित कर रहा था और इसका दायरा काफी व्यापक हो सकता है।