रांची : नये लेबर कोड्स के विरोध में श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन, आम हड़ताल की चेतावनी

रांची : नये लेबर कोड्स के विरोध में श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन, आम हड़ताल की चेतावनी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 16, 2025, 4:20:00 PM

राजधानी रांची में श्रम भवन के समक्ष भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU) के नेतृत्व में श्रमिक संगठनों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। यह विरोध कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को अधिसूचित चार श्रम संहिताओं के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा था।

प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो फरवरी 2026 में देशभर में राष्ट्रीय आम हड़ताल की जाएगी। धरने में बीएसएसआर यूनियन, हटिया मजदूर यूनियन, एनसीओईए, इंदल कगार यूनियन, आईआईसीएमयू और निर्माण कामगार यूनियन सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम में कॉमरेड प्रकाश विप्लव, वीरेंद्र कुमार, कीर्ति मुंडा, हरेंद्र यादव के साथ सीटू राज्य कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भवन सिंह, महासचिव विश्वजीत देब और वरिष्ठ नेता अनिरवन बोस ने भी भाग लिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यूनियन नेताओं का आरोप है कि वर्ष 2019-20 में चारों श्रम संहिताओं को बिना व्यापक लोकतांत्रिक चर्चा के पारित किया गया। उनका कहना है कि इन कोड्स के जरिए श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, स्थायी रोजगार और ट्रेड यूनियन के अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के नाम पर श्रम बाजार को पूरी तरह पूंजी के नियंत्रण में सौंपा जा रहा है।

प्रमुख मांगें

धरने में शामिल संगठनों ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखीं, जिनमें श्रम संहिताओं के नियमों के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक, चारों लेबर कोड्स को पूरी तरह निरस्त करना, सेल्स प्रमोशन कर्मचारी अधिनियम के प्रावधानों की सुरक्षा, ठेकाकरण प्रथा पर रोक, समान काम के लिए समान वेतन और न्यूनतम मजदूरी कानून का सख्ती से पालन शामिल है। इसके अलावा, गिग वर्कर्स को भी न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाने की मांग उठाई गई।

श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी आवाज को अनसुना किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।