सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ! संदिग्ध आतंकी ने युवती पर धर्मांतरण और आतंकी संगठन में शामिल होने का दबाव बनाया

सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ! संदिग्ध आतंकी ने युवती पर धर्मांतरण और आतंकी संगठन में शामिल होने का दबाव बनाया

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 17, 2026, 1:12:00 PM

आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े संदिग्ध आतंकी उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक गंभीर आतंकवाद मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि आरोपी ने एक युवती पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और उसे आईएसआईएस से जुड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। जांच में यह भी सामने आया है कि इनकार करने पर युवती और उसके परिजनों को जान से मारने की धमकियां दी गई थीं।

एनआईए के अनुसार, उमर बहादुर अपने सह-आरोपी फैजान अंसारी के साथ मिलकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम) के जरिए आईएसआईएस की कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहा था। दोनों का मकसद युवाओं को बहकाकर चरमपंथ की ओर धकेलना और उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करना था। फैजान अंसारी झारखंड के लोहरदगा जिले की मिल्लत कॉलोनी का निवासी है, जबकि उमर बहादुर मूल रूप से मध्य प्रदेश के रतलाम का रहने वाला है। जांच में यह भी सामने आया कि उमर बहादुर का पूर्व नाम राहुल सेन था, जिसने इस्लाम धर्म अपनाने के बाद अपना नाम बदल लिया।

जमानत याचिका खारिज, अदालत ने माने ठोस सबूत

रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने 13 जनवरी को उमर बहादुर की जमानत याचिका पर सुनवाई की थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत साक्ष्य उपलब्ध हैं। इसी आधार पर उसकी जमानत याचिका नामंजूर कर दी गई।

यूट्यूब के जरिए संपर्क, फिर शुरू हुआ उत्पीड़न

एनआईए की जांच में सामने आया है कि पीड़ित युवती एक यूट्यूब चैनल चलाती थी, जिसके माध्यम से उमर बहादुर उसके संपर्क में आया। शुरुआती बातचीत के बाद आरोपी ने उस पर धर्म बदलने और आईएसआईएस में शामिल होने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब युवती ने इसका विरोध किया और संपर्क तोड़ दिया, तो आरोपी ने कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर उसे लगातार परेशान करना शुरू कर दिया।

जांच एजेंसी के अनुसार, युवती को अपहरण और हत्या की धमकियां भी दी गईं। परेशान होकर उसने महिला हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में एनआईए ने उसका बयान दर्ज कराया, जिसे अदालत में भी प्रस्तुत किया गया।

डिजिटल सबूतों से मजबूत हुई जांच

एनआईए ने अदालत को बताया कि उमर बहादुर के पास से बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री बरामद की गई है। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में आईएसआईएस से जुड़े वीडियो, हथियारों के साथ तस्वीरें, भड़काऊ भाषण और प्रचार सामग्री मिली है। इसके अलावा, आरोपी द्वारा अलग-अलग नामों से बनाए गए कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट भी सामने आए हैं।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उमर बहादुर अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के संपर्क में था और उसने सीरिया जाकर आईएसआईएस में शामिल होने की इच्छा भी जताई थी। एनआईए का कहना है कि इन तथ्यों से आरोपी की भूमिका और मंशा स्पष्ट होती है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।