झारखंड के सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने राज्य की बैंकिंग और ट्रेजरी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महालेखाकार (AG) की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि राज्य के कई कोषागारों से वेतन मद में संदिग्ध तरीके से धन निकासी की गई है।
जांच के दौरान यह पाया गया कि कुल 33 ट्रेजरी में से 14 में वेतन भुगतान से जुड़े लेन-देन में गड़बड़ियां हुई हैं। स्क्रूटनी में सामने आया कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को एक ही महीने में दो बार वेतन जारी किया गया। यह अनियमितता सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण विभागों में ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं।
सबसे अधिक सवाल पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिपाही से लेकर डीएसपी स्तर तक के कर्मियों ने या तो सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया या फिर आपसी मिलीभगत से एक ही महीने में दो बार वेतन प्राप्त किया। जांच में चार डीएसपी के नाम विशेष रूप से सामने आए हैं, जिनके खातों में एक महीने के भीतर दो बार सैलरी ट्रांसफर होने के संकेत मिले हैं।
इस खुलासे के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई है। वित्तीय अनुशासन और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।