झारखंड में उत्पाद सिपाही मुख्य परीक्षा 2023 से पहले एक बड़े संगठित पेपर लीक गिरोह का खुलासा हुआ है। रांची पुलिस की कार्रवाई में तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अधूरे निर्माण वाले नर्सिंग होम पर छापा मारकर 159 अभ्यर्थियों के साथ गिरोह से जुड़े कई लोगों को पकड़ा गया। इस पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले मुख्य आरोपी क्रिस्टोफर और प्रश्न पत्र की चोरी में शामिल चुनचुन कुमार फिलहाल जांच एजेंसियों के फोकस में हैं।
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि इस अवैध नेटवर्क ने अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली थी। प्रत्येक उम्मीदवार से करीब 10 लाख रुपये तय किए गए थे, जिनमें से 3 लाख रुपये अग्रिम लिए गए। शेष राशि चयन के बाद देने की शर्त रखी गई थी। इसके साथ ही अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज भी गिरोह ने अपने पास सुरक्षित रखे थे, ताकि भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य ठिकाना रड़गांव बना हुआ था, जहां एक अधूरी नर्सिंग होम बिल्डिंग को गुप्त केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपी क्रिस्टोफर ने स्थानीय स्तर पर सांठगांठ कर इस जगह को सुरक्षित अड्डे में बदल दिया था। पुलिस की नजर से बचने के लिए गिरोह के सदस्यों को नए मोबाइल फोन दिए गए थे। हालांकि 11 अप्रैल की रात छापेमारी से पहले ही क्रिस्टोफर फरार हो गया और जाते-जाते अपने संपर्क के सभी डिजिटल निशान मिटाने की कोशिश की।
मामले में बड़ा खुलासा तब हुआ जब चुनचुन कुमार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से ही प्रश्न पत्र हासिल किया था। इसके बाद यह पेपर पटना निवासी विकास कुमार को भेजा गया, जिसने रड़गांव पहुंचकर उसकी कई प्रतियां तैयार कीं। मौके पर मौजूद अभ्यर्थियों को वही प्रश्न याद कराए जा रहे थे, जिससे वे परीक्षा में आसानी से सफल हो सकें।
जांच में गिरोह के अलग-अलग सदस्यों की भूमिकाएं भी स्पष्ट हुई हैं। चुनचुन कुमार पर पेपर चोरी कर गिरोह तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, जबकि विकास कुमार प्रिंट निकालकर उसे वितरित करता था। अतुल वत्स सोशल मीडिया के जरिए अभ्यर्थियों को जोड़ने और उनके प्रवेश पत्र जमा कराने का काम देख रहा था। वहीं आशीष और योगेश एजेंट के तौर पर उम्मीदवारों को इस जाल में फंसाते थे। रड़गांव केंद्र का संचालन मुकेश उर्फ शेर सिंह कर रहा था, जो क्रिस्टोफर के साथ समन्वय बनाए हुए था।
पुलिस ने इस मामले में कुल 179 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। गिरफ्तार अभ्यर्थियों में सबसे ज्यादा संख्या गिरिडीह और हजारीबाग जिलों की पाई गई है। इसके अलावा बिहार सहित अन्य जिलों के उम्मीदवार भी इसमें शामिल हैं। पकड़े गए लोगों में सात महिला अभ्यर्थी भी हैं, जिनमें अधिकांश स्थानीय क्षेत्र की बताई जा रही हैं।
इस कार्रवाई के बाद राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।