निजी एजेंसी से तारकोल खरीदना पड़ा भारी, ठेकेदार को 3 साल की जेल

निजी एजेंसी से तारकोल खरीदना पड़ा भारी, ठेकेदार को 3 साल की जेल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 22, 2026, 1:49:00 PM

रांची स्थित CBI की विशेष अदालत ने करीब डेढ़ दशक पुराने अलकतरा (तारकोल) घोटाला मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए ठेकेदार झमन प्रसाद को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है, तो दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

वहीं, इसी मामले में आरोपी बनाए गए चार तत्कालीन कनीय अभियंताओं (JE) और दो सहायक अभियंताओं (AE) समेत कुल छह इंजीनियरों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने आरोपों से मुक्त कर दिया। इन सभी ने मुकदमे के दौरान अपना ट्रायल फेस किया था।

यह मामला वर्ष 2009 में दर्ज किया गया था, जबकि कथित अनियमितताएं 2005-06 में भुरकुंडा से पतरातू के बीच लगभग छह किलोमीटर सड़क के नवीकरण कार्य के दौरान सामने आई थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी नियमों के तहत सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला अलकतरा अधिकृत सरकारी एजेंसी से खरीदा जाना चाहिए था, लेकिन संबंधित सामग्री निजी स्रोत से खरीदकर वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया गया।

CBI की जांच में इस प्रक्रिया के कारण 20.23 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। सुनवाई के दौरान CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशील कुमार ने अदालत में 14 गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी करार दिया।

मामले में कुल सात आरोपियों पर मुकदमा चला था। अदालत से बरी हुए अभियंताओं में भुनेश्वर महतो वर्तमान में पथ प्रमंडल, गोड्डा में कनीय अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, जबकि शेष पांच अभियंता सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।