'महादेव' पर बयान को लेकर सियासी संग्राम, भाजपा नेत्री अंशु तिवारी सिन्हा ने जताई कड़ी आपत्ति

'महादेव' पर बयान को लेकर सियासी संग्राम, भाजपा नेत्री अंशु तिवारी सिन्हा ने जताई कड़ी आपत्ति

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 29, 2026, 11:06:00 AM

आदिवासी नेत्री निशा भगत के उस बयान पर विवाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि महादेव आदिवासियों के देवता हैं और बाद में हिंदुओं ने उन्हें अपनाया। इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेत्री अंशु तिवारी सिन्हा ने इसे तथ्यहीन, भ्रम फैलाने वाला और समाज को बांटने की कोशिश करार दिया है।

अंशु तिवारी सिन्हा ने कहा कि भगवान शिव, जिन्हें महादेव कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्राचीनतम और मूल आराध्य देवताओं में शामिल हैं। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया कि ऋग्वेद में रुद्र के रूप में, यजुर्वेद और अथर्ववेद में शिव स्वरूप में तथा उपनिषदों और पुराणों में विस्तार से उनका वर्णन मिलता है। शिवपुराण, लिंगपुराण और स्कंदपुराण जैसे ग्रंथों में महादेव को सृष्टि के आरंभ से जुड़ा बताया गया है, जो उनकी सनातन उपासना परंपरा को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, सोमनाथ, महाकाल और रामेश्वरम सहित बारह ज्योतिर्लिंग हिंदू आस्था के मजबूत प्रतीक हैं। ये तीर्थस्थल न केवल धार्मिक विश्वास के केंद्र हैं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और निरंतरता के भी साक्ष्य हैं। सदियों से करोड़ों श्रद्धालु महादेव को अपना आराध्य मानते आ रहे हैं।

भाजपा नेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन हिंदू परंपरा हमेशा से व्यापक और समावेशी रही है। इसमें आदिवासी समाज, लोक आस्थाएं और क्षेत्रीय परंपराएं सम्मान के साथ समाहित होती रही हैं। उनके अनुसार आदिवासी समाज हिंदू सांस्कृतिक धारा का अभिन्न अंग रहा है, न कि उससे अलग कोई समुदाय।

अपने बयान में अंशु तिवारी सिन्हा ने कहा कि यह दावा करना कि हिंदुओं ने महादेव को अपनाया, इतिहास और सनातन दर्शन दोनों का अपमान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महादेव हिंदू धर्म के देवता थे, हैं और सदैव रहेंगे, और उनकी आस्था किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।

उन्होंने ऐसे बयानों को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कहा कि आस्था से जुड़े विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए विवाद का रूप देना दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही उन्होंने समाज के सभी वर्गों से विभाजनकारी सोच को अस्वीकार करने और सनातन संस्कृति की एकता व समरसता को सुदृढ़ करने की अपील की।