झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सार्वजनिक अपीलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को खर्च और उपभोग कम करने की सलाह देना इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार आर्थिक मोर्चे पर लोगों को राहत देने में असफल रही है।
दूबे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से सोने की खरीद सीमित करने, ईंधन की खपत घटाने, विदेश यात्राओं से बचने, मेट्रो का अधिक उपयोग करने और जरूरतों में कटौती जैसी बातें कहना किसी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि मौजूदा आर्थिक दबावों की स्वीकारोक्ति है। उनके मुताबिक, एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी यदि सरकार जनता को जीवनशैली बदलने की सलाह देने पर मजबूर है, तो यह अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मौजूदा हालात में सरकार समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय जनता पर जिम्मेदारी डाल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पेट्रोल और जरूरी वस्तुएं महंगी हो रही हैं तो उसका भार आम नागरिक ही क्यों उठाए। उनके अनुसार, महंगाई और करों के बोझ से पहले ही मध्यम वर्ग, गरीब परिवार और छोटे कारोबारी परेशान हैं।
आलोक दूबे ने यह भी कहा कि यदि इसी तरह की परिस्थितियां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के समय पैदा हुई होतीं, तो भाजपा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करती। उन्होंने दावा किया कि आज जब बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता जैसे मुद्दे गंभीर रूप ले चुके हैं, तब केंद्र सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय लोगों को सलाह देने में व्यस्त दिखाई देती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल, दाल और बिजली जैसी आवश्यक चीजों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे आम लोगों की घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। दूबे ने कहा कि सरकार राहत उपायों पर पर्याप्त ध्यान देने के बजाय प्रचार और बड़े आयोजनों पर भारी खर्च कर रही है।
कांग्रेस महासचिव ने यह भी सवाल उठाया कि आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों, विशेषज्ञों और विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक संवाद क्यों नहीं किया। उनके अनुसार, देश को मौजूदा परिस्थितियों में ठोस आर्थिक नेतृत्व और पारदर्शी नीति की जरूरत है।
दूबे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों; विशेषकर महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव को लगातार उठाती रहेगी और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करती रहेगी।