झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सांसदों और विधायकों के लिए प्रस्तावित आवासीय परियोजना से जुड़ी जमीन को लेकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में कहा कि इस मामले पर राजस्व मंत्री, राजस्व विभाग के सचिव और रांची के उपायुक्त के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। जांच में सामने आया कि कांके क्षेत्र में लगभग 35 एकड़ भूमि का आवंटन वर्ष 2016 में किया गया था।
मंत्री ने बताया कि यह जमीन स्वालंबी सहकारी समिति के संयुक्त सचिव के नाम हस्तांतरित की गई थी। बाद में 14 अप्रैल 2018 को गृह निर्माण समिति की ओर से करीब 1.70 करोड़ रुपये जमा किए गए और 1 जून 2018 को इस संबंध में समझौता प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इसके बाद जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।
हालांकि, वर्तमान स्थिति का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि कुल 35 एकड़ में से लगभग 3.30 एकड़ भूमि रिंग रोड के दायरे में आ चुकी है। करीब दो एकड़ जमीन पर आदिवासी समुदाय का मसना (शमशान स्थल) है। इसके अलावा लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में सात डोभा मौजूद हैं और तीन एकड़ जमीन गड्ढों से प्रभावित है। शेष लगभग 23.70 एकड़ भूमि पर स्थानीय ग्रामीण खेती कर रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, इस जमीन की बंदोबस्ती वर्ष 1970-71 में बंधना करमाली, चरकू करमाली, चरकू मुंडा समेत अन्य लोगों के नाम की गई थी और तब से वे इस पर खेती करते आ रहे हैं। बाद में रघुवर दास के कार्यकाल में इनकी जमाबंदी रद्द कर दी गई थी, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समुदाय की जमीन पर जनप्रतिनिधियों के लिए आवास निर्माण नहीं किया जाएगा। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार दो महीने के भीतर विवाद से मुक्त किसी अन्य जमीन की पहचान कर उसे समिति को आवंटित कर देगी।