झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक प्रकरण में आरोपी मोनू कुमार और सोनू शर्मा को फिलहाल राहत नहीं मिली है। दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलें पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 12 जून के लिए निर्धारित कर दी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, मोनू कुमार और सोनू शर्मा कथित तौर पर उस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हैं, जिस पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक कराने और अभ्यर्थियों को सॉल्वर गैंग के माध्यम से मदद पहुंचाने का आरोप है। इसी वजह से दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर कानूनी बहस जारी है।
इस मामले में अब तक बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को न्यायालय से राहत मिल चुकी है। जानकारी के मुताबिक 160 से अधिक आरोपी परीक्षार्थियों को जमानत दी जा चुकी है। हालांकि, पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़े कई प्रमुख आरोपियों को अदालत ने जमानत देने से इनकार किया है।
मामले की शुरुआत 11 अप्रैल को हुई व्यापक पुलिस कार्रवाई से जुड़ी है। उस दिन पुलिस ने तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव में छापेमारी कर 166 लोगों को हिरासत में लिया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में कथित पेपर लीक गिरोह के संचालक और उससे जुड़े सदस्य भी शामिल बताए गए थे। जांच में अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद जैसे नाम सामने आए थे, जिन्हें नेटवर्क के प्रमुख चेहरों में गिना जा रहा है।
पुलिस का दावा है कि गिरोह के सदस्य परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न और उनके उत्तर याद कराने का काम कर रहे थे। इसके लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को एक स्थान पर एकत्र किया गया था।
छापेमारी की कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी। पुलिस को खबर मिली थी कि रड़गांव स्थित एक अधूरे भवन में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं और वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। सूचना के बाद गठित विशेष टीम ने देर रात मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। पुलिस को देखते ही कई लोग भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर 166 लोगों को पकड़ लिया।
बाद की जांच और कार्रवाई के दौरान अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हुई। पूरे मामले को लेकर तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 दर्ज किया गया है और जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।