देश के अग्रणी वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में शुमार पलामू टाइगर रिज़र्व (PTR) एक बार फिर अपने प्रभावी और समन्वित संरक्षण प्रयासों को लेकर चर्चा में रहा। हाल ही में भारतीय वन सेवा (IFS) बैच 2024 के प्रशिक्षु अधिकारियों का दो दिवसीय शैक्षणिक एवं फील्ड विज़िट कार्यक्रम यहां सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें संरक्षण कार्यों की जमीनी समझ पर विशेष जोर दिया गया।
इस अध्ययन भ्रमण में IFS प्रशिक्षु राजेश सिन्हा, ऋत्विका पांडेय, लावा कुमार और राहुल कुमार शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने रिज़र्व में चल रही विभिन्न योजनाओं, तकनीकी प्रयोगों और समुदाय आधारित पहलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
मैदानी अनुभव और प्रशिक्षण सत्र
भ्रमण की शुरुआत एम-स्ट्राइप पेट्रोलिंग गतिविधि से हुई, जहां प्रशिक्षु अधिकारियों ने एंटी-पोचिंग कैंप के ट्रैकर्स से बातचीत कर शिकार-रोधी रणनीतियों और फील्ड स्तर की चुनौतियों को समझा। इसके बाद आयोजित ओवरव्यू सत्र में PTR के संरक्षण दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों और प्रबंधन मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
अधिकारियों ने बोमा साइट का भी दौरा किया, जहां बाघ संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े वैज्ञानिक प्रयासों की जानकारी साझा की गई। वहीं, ‘हुनर से रोजगार केंद्र’ में स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों ने प्रशिक्षुओं का विशेष ध्यान खींचा।
समुदाय संवाद और जमीनी चुनौतियां
ग्रासलैंड क्षेत्र और पोलपोल गांव के दौरे के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रवासी एवं स्थानीय समुदायों से संवाद किया। इस दौरान वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता, जल संकट, आजीविका के साधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई।
प्रशिक्षु अधिकारियों की प्रतिक्रिया
IFS प्रशिक्षुओं ने PTR की संगठित कार्यशैली, प्रशिक्षित फील्ड अमले, तकनीकी दक्षता और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने पलामू टाइगर रिज़र्व को देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बताया।
इस पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था लातेहार पुलिस बल द्वारा संभाली गई, जबकि भ्रमण कार्यक्रम का मार्गदर्शन PTR के फील्ड डायरेक्टर एस. आर. नटेश और डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश जेना के नेतृत्व में किया गया।