जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर सवालों के घेरे में ‘आदर्श गांव’ टकरा, विकास के वादे अब भी अधूरे

जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर सवालों के घेरे में ‘आदर्श गांव’ टकरा, विकास के वादे अब भी अधूरे

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 03, 2026, 1:17:00 PM

आदिवासी समाज के महान नेता, स्वतंत्रता सेनानी और ओलंपियन मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती आज मनाई जा रही है। इस अवसर पर उनके पैतृक गांव टकरा में श्रद्धांजलि और आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, लेकिन जयंती के साथ ही गांव के अधूरे विकास को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

करीब एक दशक पहले टकरा गांव को ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे गोद लेकर आदर्श गांव बनाने का ऐलान किया था। इसके बावजूद, इतने वर्षों के बाद भी गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ नजर आती है। विकास कार्यों की रफ्तार धीमी रही और कई योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गईं।

जयपाल सिंह मुंडा की समाधि स्थल की हालत भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले दो वर्षों से रंगाई-पुताई न होने के कारण दीवारें काली पड़ चुकी हैं, जिससे रखरखाव के अभाव की तस्वीर सामने आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जयंती के समय ही नहीं, पूरे वर्ष इस स्थल की समुचित देखभाल होनी चाहिए।

जयंती समारोह के अवसर पर टकरा गांव में कई प्रमुख हस्तियों के पहुंचने की संभावना है। खूंटी संसदीय क्षेत्र के सांसद कालीचरण मुंडा, विधायक राम सूर्या मुंडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा समेत अन्य गणमान्य लोग समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ फुटबॉल और अन्य खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है। कार्यक्रम से पहले अतिथि समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। गांव के लोग इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं और स्वयं तैयारियों में जुटे हुए हैं।

विकास योजनाओं के तहत टकरा गांव में मिनी हॉकी स्टेडियम, पीसीसी सड़कें, पंचायत सचिवालय भवन, अस्पताल भवन, मिनी जिम और सोलर आधारित पेयजल जलमीनार जैसी संरचनाएं स्थापित की गई हैं। गांव के प्रवेश द्वार पर जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा भी लगाई गई है। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आती है। मिनी हॉकी स्टेडियम की स्थिति ऐसी है कि वहां हॉकी खेल पाना संभव नहीं है और फिलहाल मैदान का उपयोग केवल फुटबॉल के लिए किया जा रहा है।

जयपाल सिंह मुंडा के पुत्र जयंत जयपाल सिंह मुंडा का कहना है कि हर वर्ष जयंती के मौके पर विकास को लेकर बड़ी घोषणाएं होती हैं, लेकिन उन्हें पूरा होने में वर्षों लग जाते हैं। उनके अनुसार कई योजनाएं अब भी अधूरी हैं। शिक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने चिंता जताई और बताया कि गांव में पढ़ाई की स्थिति कमजोर होने के कारण वह और उनका परिवार स्वयं बच्चों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जयपाल सिंह मुंडा के नाम पर संचालित छात्रवृत्ति योजना अच्छी पहल है, लेकिन इसका लाभ राज्य के केवल 15–20 आदिवासी विद्यार्थियों तक ही सीमित रह गया है।

गौरतलब है कि जयपाल सिंह मुंडा खूंटी लोकसभा क्षेत्र के पहले सांसद थे और उन्होंने लगातार पांच बार संसद में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय हॉकी टीम के उत्कृष्ट खिलाड़ी भी रहे और 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में उनके नेतृत्व में भारत ने पहला स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वे संविधान सभा के सदस्य भी थे। उनके इसी ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने मुरही पंचायत अंतर्गत टकरा गांव को आदर्श ग्राम बनाने का निर्णय लिया था।

हालांकि, आदर्श गांव का दर्जा मिलने और कुछ विकास कार्य होने के बावजूद टकरा आज भी समग्र विकास की राह पर काफी पीछे नजर आता है। जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि के साथ-साथ अब गांव के लोग यह उम्मीद भी कर रहे हैं कि घोषणाओं से आगे बढ़कर विकास कार्य वास्तव में जमीन पर उतरें।