रांची विश्वविद्यालय में NSUI का प्रदर्शन, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

रांची विश्वविद्यालय में NSUI का प्रदर्शन, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 14, 2026, 11:46:00 AM

कोरोना महामारी के बाद रांची विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में सत्र लगातार एक से दो साल पीछे चल रहा है, वहीं परीक्षाओं और परिणामों में अनियमितताओं ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। बड़ी संख्या में छात्रों का आरोप है कि गलत मूल्यांकन के कारण उन्हें असफल घोषित कर दिया गया है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर सोमवार को छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आया। खूंटी, लोहरदगा, गुमला और रांची समेत विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के नेतृत्व में यह आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया। प्रदर्शनकारी छात्र करीब आठ घंटे तक गेट पर डटे रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। इस दौरान वे बिना भोजन-पानी के धरने पर बैठे रहे, लेकिन दिनभर कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे संवाद करने नहीं पहुंचा।

लंबे इंतजार के बाद शाम करीब पांच बजे विश्वविद्यालय के प्राक्टर मुकुंद चंद्र मेहता प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों की मांगों को सुना और ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि 16 अप्रैल को विश्वविद्यालय के सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे और समस्याओं के समाधान पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

उधर, दिनभर चले इस हंगामे के बीच देर शाम नई कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने मोरहाबादी स्थित आईक्यूएसी कार्यालय में अपना पदभार संभाला। उनकी नियुक्ति को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए और प्रक्रिया की जांच की मांग की।

इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। कांग्रेस नेता कुमार राजा धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों की मांगों का समर्थन किया। वहीं एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव सहित कई छात्र नेताओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सत्र 2023-27 की परीक्षा तिथि शीघ्र घोषित करने, परिणामों में गड़बड़ी की जांच कराने, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, उत्तर पुस्तिकाओं के गायब होने के मामलों की जांच, पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने, छात्रसंघ चुनाव कराने, डिजिटल प्रणाली को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसी मांगें शामिल हैं।

छात्रों का कहना है कि समय पर परीक्षा और परिणाम नहीं होने से उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई छात्रों ने बताया कि उनका कोर्स समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन सत्र में देरी के कारण वे अभी तक परीक्षाओं में ही उलझे हुए हैं।

हालांकि प्रशासन के आश्वासन के बाद छात्रों ने फिलहाल अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा और अधिक तीव्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।