रांची के धुर्वा थाना अंतर्गत मौसीबाड़ी खटाल इलाके से दो जनवरी की दोपहर लापता हुए मासूम भाई-बहन अंश और अंशिका का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। घटना को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी बच्चों के बारे में ठोस जानकारी न मिलने से पुलिस की चिंता बढ़ती जा रही है और परिजनों की हालत बेहद दयनीय हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। चार आईपीएस अधिकारी और आठ डीएसपी खुद इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। अलग-अलग दिशाओं में आठ टीमों को लगाया गया है, जबकि रांची पुलिस ने बच्चों की सुरक्षित बरामदगी के लिए 51 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की है।
परिजनों के मुताबिक, दो जनवरी को दोपहर करीब 2.30 बजे अंश अपनी छोटी बहन अंशिका को साथ लेकर बिस्कुट खरीदने घर से निकला था, लेकिन दोनों वापस नहीं लौटे। उसी दिन पुलिस को सूचना दे दी गई थी। धुर्वा थाना प्रभारी बिमल किंडो ने बताया कि पहले दिन सनहा दर्ज किया गया था और 24 घंटे के भीतर बच्चों का पता नहीं चलने पर अगले दिन उसे प्राथमिकी में तब्दील किया गया। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है।
इधर, बच्चों की मां नीतू इस सदमे से उबर नहीं पा रही हैं। लगातार रोते हुए वह बस एक ही गुहार लगा रही हैं कि उनके अंश और अंशिका को किसी तरह घर वापस लाया जाए। नीतू ने बताया कि उनकी शादी छह साल पहले पटना के मनेर थाना क्षेत्र निवासी सुनील कुमार से हुई थी। शादी के एक साल बाद अंश का जन्म हुआ और फिर एक साल के अंतराल पर अंशिका हुई। इन दोनों से छोटा उनका एक और बेटा है, जिसकी उम्र करीब दो साल है।
परिवार कुछ साल पहले पटना से रांची आकर मौसीबाड़ी इलाके में रहने लगा था। रांची आने से पहले ही अंश और अंशिका का नाम पास के आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज करा दिया गया था। शुरुआत में बच्चों के दादा उन्हें आंगनबाड़ी ले जाया करते थे, लेकिन बाद में अंश खुद बहन को लेकर आने-जाने लगा। अंश पहले भी अकेले दुकान और आसपास के बाजार तक जाता रहा था, हालांकि दो जनवरी को पहली बार अंशिका उसके साथ बिस्कुट खरीदने निकली थी।
जांच के दौरान पुलिस की तकनीकी टीमों को कोई खास सफलता नहीं मिली है। अब डॉग स्क्वॉयड की मदद से मामले में अहम सुराग मिलने की उम्मीद जगी है। डॉग स्क्वॉयड की सदस्य मौली को बच्चों के कपड़े सुंघाए गए, जिसके बाद वह बार-बार एक दुकान के पास स्थित पार्किंग स्थल में खड़ी ओमनी वैन तक पहुंची। वैन का नंबर JH01 CT 7349 बताया जा रहा है। मौली का वैन की सीट पर जाकर बैठ जाना पुलिस के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बच्चों को किसी अन्य स्थान तक ले जाने में इसी वाहन का इस्तेमाल हुआ हो सकता है।
इस कड़ी में पुलिस ने वैन मालिक रितेश कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। रितेश अपनी पत्नी चंदा देवी के साथ दुकान चलाता है। पूछताछ के लिए रितेश, उसकी पत्नी और मां शांति देवी—तीनों को धुर्वा थाने में रखा गया है। हालांकि रितेश ने अपहरण में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं की गहन जांच कर रही है और परिजन बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे हैं, जब उनके मासूम बच्चे सुरक्षित घर लौट सकें।