नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के VC पर 'एक व्यक्ति एक पद' नियम उल्लंघन का आरोप

नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के VC पर 'एक व्यक्ति एक पद' नियम उल्लंघन का आरोप

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 10, 2025, 2:21:00 PM

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक सुधार के तहत “एक व्यक्ति, एक पद” नियम को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था। लेकिन नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने राज्यपाल के दिशा-निर्देश की अवहेलना करते हुए कई अधिकारियों को एक से अधिक पद दे रखे हैं। साथ ही वित्त पदाधिकारी (FO) के प्रभार के लिए राज्यपाल से अनुमति भी नहीं ली गई।

दिनेश कुमार सिंह पहले रांची विश्वविद्यालय और विनोबा भावे विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति के रूप में रहते हुए भी कई विवादास्पद कार्रवाइयों में शामिल रहे हैं।

कई पदों में विभक्त अधिकारी

मनोरमा सिंह, जो हिंदी विभाग की व्याख्याता हैं, को कुल चार पद दिए गए हैं। उनके पास Faculty of Humanities के डीन का प्रभार, CCDC का प्रभार और 70-75 किलोमीटर दूर स्थित लातेहार महिला महाविद्यालय की प्रिंसिपल का पद भी है।

इसी तरह अंग्रेजी विभाग के व्याख्याता बिमल कुमार सिंह के पास भी कई जिम्मेदारियां हैं। वह PG अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष होने के साथ-साथ वित्त पदाधिकारी का काम भी कर रहे हैं। वित्त पदाधिकारी का पद प्रशासनिक है और इस पर नियुक्ति JPSC के माध्यम से होती है। विशेष परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत FO के रूप में किसी से कार्य लेने के लिए राज्यपाल की अनुमति जरूरी है। लेकिन बिमल कुमार सिंह ने इस अनुमति के बिना ही पद संभाला और उनकी उम्र भी 60 साल से अधिक हो चुकी है, जबकि इस पद पर अधिकतम उम्र सीमा 60 साल है।

पूर्व विवाद और आरोप

नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के VC को पहले रांची और विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अतिरिक्त प्रभार दिए गए थे। इन विश्वविद्यालयों में प्रभारी कुलपति रहते हुए उन्होंने टेंडर रद्द करना, गाड़ियों का निजी उपयोग और अन्य विवादास्पद कार्यों में शामिल होने के आरोप झेले हैं।

इसके अलावा उन पर खूंटी जिले के एक कॉलेज के प्रिंसिपल को फर्नीचर की आपूर्ति के लिए दबाव डालने का भी आरोप है। राज्यपाल को यह शिकायत मिलने के बाद उन्हें रांची विश्वविद्यालय के VC पद से हटा दिया गया था।