नक्सल प्रभावित इलाकों में नई पहल, झारखंड भी अपनायेगा ‘बस्तर ओलंपिक’ मॉडल

नक्सल प्रभावित इलाकों में नई पहल, झारखंड भी अपनायेगा ‘बस्तर ओलंपिक’ मॉडल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 11, 2026, 12:28:00 PM

झारखंड में नक्सल प्रभाव को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार और पुलिस अब नई रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खेल और रोजगार को माध्यम बनाया जाएगा। इस पहल की शुरुआत खेल गतिविधियों से की जा रही है, जिसके लिए छत्तीसगढ़ के सफल ‘बस्तर ओलंपिक’ मॉडल को अपनाया जा रहा है।

दरअसल, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक जुड़ाव बढ़ाने और युवाओं को हिंसा के रास्ते से दूर करने के उद्देश्य से यह योजना बनाई गई है। डीजीपी और आईजी स्तर की राष्ट्रीय बैठक में इस मॉडल को प्रभावी मानते हुए सभी प्रभावित राज्यों में लागू करने की सिफारिश की गई थी। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के मार्गदर्शन में झारखंड पुलिस ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी झारखंड जगुआर के डीआईजी इंद्रजीत महता को सौंपी गई है।

छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर ओलंपिक’ को नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान एक सफल प्रयोग माना गया है। वर्ष 2025 में आयोजित इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में ऐसे युवाओं ने भाग लिया था, जिन्होंने पहले नक्सल गतिविधियों से दूरी बनाई थी। इस पहल ने युवाओं के बीच सकारात्मक माहौल तैयार करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में अहम भूमिका निभाई।

झारखंड की स्थिति पर नजर डालें तो कुछ इलाकों में अब भी नक्सल प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार चाईबासा अब भी संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है, जबकि बोकारो, चतरा और लातेहार को जोखिम और पूर्व प्रभाव वाले जिलों की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में इन क्षेत्रों में इस तरह की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित डीजी/आईजी सम्मेलन में यह भी तय किया गया था कि नक्सल प्रभावित और पूर्व प्रभावित दोनों तरह के जिलों में पुलिस की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित न रहकर सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की होनी चाहिए। रणनीति को सख्ती से हटाकर जनसंपर्क और विकास केंद्रित बनाया जाएगा, जिससे युवाओं को सकारात्मक दिशा मिल सके।

इसके तहत ब्लॉक और जिला स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही आदिवासी युवाओं के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के शैक्षणिक भ्रमण की योजना भी बनाई गई है, ताकि वे व्यापक समाज से जुड़ सकें और उनमें राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हो।