झारखंड सरकार ने मानसून के दौरान संभावित बालू संकट से निपटने और अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में कई महत्वपूर्ण बालू घाटों के पट्टा विलेख पर जिला प्रशासन द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिसके बाद अब संचालन संबंधी अंतिम स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से आने वाले महीनों में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बनी रहेगी और अवैध कारोबार पर भी अंकुश लगेगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिन घाटों के लीज दस्तावेज पूरे किए जा चुके हैं, उनमें गोड्डा जिले के राहा और झिलुआ घाट, जामताड़ा का असनचुआ घाट, रांची के श्यामनगर और चोकेसरेन्ग घाट, बोकारो के पिछरी-2 एवं खेतको चालकारी घाट तथा पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र के कोरेयामोहनपाल और सुवर्णरेखा घाट शामिल हैं। इन घाटों के संचालन के लिए अब प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां, यानी CTE और CTO, प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है।
बालू की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने कुछ अहम स्थानों पर भंडारण केंद्र भी विकसित किए हैं। लोचनी, मकनी, गारीहलमाद और खेतको जैसे इलाकों में बनाए गए स्टॉकयार्ड मानसून अवधि में आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दौरान खनन गतिविधियों पर लगने वाले प्रतिबंध के बावजूद इन भंडारण केंद्रों के जरिए निर्माण कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
इसी बीच राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) ने 35 नए बालू घाटों को पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान की है। इन घाटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 192.99 हेक्टेयर है। सबसे अधिक क्षेत्रफल पूर्वी सिंहभूम जिले में स्वीकृत हुआ है, जहां करीब 85.40 हेक्टेयर क्षेत्र को मंजूरी मिली है। इसके अलावा बोकारो में 30.86 हेक्टेयर, हजारीबाग में 15.26 हेक्टेयर, दुमका में 13.54 हेक्टेयर और रांची में 12.50 हेक्टेयर क्षेत्र को स्वीकृति दी गई है। जामताड़ा और गोड्डा में क्रमशः 9.60 और 9.59 हेक्टेयर क्षेत्र वाले घाटों को अनुमति मिली है, जबकि लातेहार, खूंटी और रामगढ़ में भी नए घाटों को हरी झंडी दी गई है।
खनन विभाग के अनुमान के मुताबिक, एक हेक्टेयर बालू घाट से औसतन 4 से 5 लाख घनफुट बालू निकाला जा सकता है। इसी आधार पर नए स्वीकृत घाटों की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.5 करोड़ से 5 करोड़ सीएफटी के बीच आंकी गई है। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा मानसून अवधि में लागू प्रतिबंध से पहले सीमित समय में ही बड़ी मात्रा में बालू का भंडारण संभव है। अनुमान है कि एक महीने के भीतर 1 से 2 करोड़ सीएफटी तक बालू सुरक्षित रूप से स्टॉक किया जा सकता है।
सरकार को उम्मीद है कि इन व्यवस्थाओं से मानसून के दौरान राज्य में निर्माण परियोजनाओं की रफ्तार बनी रहेगी, साथ ही अवैध खनन और कालाबाजारी जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी।