प्रश्नकाल में गरजे विधायक, भर्तियों और निविदाओं पर सरकार से मांगा हिसाब

प्रश्नकाल में गरजे विधायक, भर्तियों और निविदाओं पर सरकार से मांगा हिसाब

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 25, 2026, 1:19:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार की कार्यवाही अल्पसूचित प्रश्नों के साथ शुरू हुई, जहां सदस्यों ने शहरी निकायों के कर्मचारियों की सेवा शर्तों, परिवहन विभाग में पदों की स्थिति और पीडब्ल्यूडी की निविदाओं में हो रही देरी को लेकर सरकार को घेरा। प्रश्नकाल के दौरान कई विभागों से जुड़े प्रशासनिक मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।

नगर निकाय कर्मियों की स्थिति पर सरकार का जवाब

विधायक अरूप चटर्जी ने नगरपालिकाओं में कार्यरत 63 अधिकारियों की सेवा नियमावली को लेकर स्पष्ट नीति की मांग की। उन्होंने पूछा कि इन कर्मियों का भविष्य क्या होगा और उनकी सेवा शर्तें किस श्रेणी में आएंगी। संबंधित मंत्री ने जवाब में कहा कि ये कर्मचारी राज्य सरकार के नहीं, बल्कि नगर निकायों के अधीन आते हैं, इसलिए उन पर नगरपालिका के नियम ही लागू होंगे।

परिवहन विभाग में भर्ती पर स्थिति स्पष्ट

मोटरयान निरीक्षकों की कमी का मुद्दा विधायक चंद्रदेव महतो ने उठाया। उन्होंने जानना चाहा कि 2023 में हुई नियुक्तियों के बाद भी पद खाली हैं या नहीं। विभाग की ओर से बताया गया कि 46 पदों के लिए जारी अधिसूचना के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और फिलहाल कोई पद रिक्त नहीं है। हालांकि भविष्य की जरूरत को देखते हुए 21 अतिरिक्त पद सृजित करने का प्रस्ताव दिसंबर में भेजा गया है।

पीडब्ल्यूडी टेंडर में देरी पर तीखी बहस

सदन में सबसे अधिक चर्चा पीडब्ल्यूडी की निविदाओं को लेकर हुई। विधायक हेमलाल मुर्मू और मथुरा महतो ने आरोप लगाया कि नियम के अनुसार 180 दिनों में पूरी होने वाली प्रक्रिया कई मामलों में एक वर्ष तक लंबित रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री के निर्देश के बावजूद कुछ टेंडर रद्द नहीं किए गए। मंत्री ने देरी को स्वीकार करते हुए बताया कि 2024-25 की लंबित निविदाओं को जल्द निपटाने का आदेश दे दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी कि 30 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

पुल निर्माण की सीमा पर अध्यक्ष की टिप्पणी

विधायक अमित कुमार ने सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए निर्धारित 10 करोड़ रुपये की सीमा को अव्यवहारिक बताया और कहा कि इससे बड़े पुलों का काम प्रभावित हो रहा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि जिन परियोजनाओं की लागत अधिक है, उन्हें ग्रामीण विकास विभाग के बजाय पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया जाए, ताकि तकनीकी और वित्तीय अड़चनें दूर हो सकें।