भूमि अधिकार और 1932 स्थानीय नीति पर सदन में गरजे विधायक जयराम महतो

भूमि अधिकार और 1932 स्थानीय नीति पर सदन में गरजे विधायक जयराम महतो

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 16, 2026, 6:15:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में डुमरी के विधायक जयराम महतो ने राज्य की भूमि नीति, सामाजिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। विभिन्न विभागों के बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान यहां के लोगों की जमीन और खेती से जुड़ी हुई है, इसलिए भूमि अधिकारों की सुरक्षा राज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय होना चाहिए।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि ब्रिटिश काल में आदिवासी और मूलवासी समुदायों की जमीन को सुरक्षित रखने के लिए विलकिंसन नियम के साथ छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT) जैसे कानून लागू किए गए थे। इसके बावजूद आज भी कई जगहों पर बड़े औद्योगिक घरानों द्वारा किसानों की जमीन अधिग्रहित करने के मामले सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है।

देवघर एयरपोर्ट परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के नए नियम लागू होने के बावजूद किसानों को उनकी जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में अब भी पुराने मापदंडों के आधार पर मुआवजा तय किया जा रहा है, जिससे रैयतों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विधायक ने राज्य में जमीन से जुड़े अपराधों और जमीन माफियाओं की बढ़ती सक्रियता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान रांची और आसपास के क्षेत्रों में हुई कई हत्याओं का संबंध भूमि विवाद से रहा है। साथ ही अंचल कार्यालयों में भूमि संबंधी तीन लाख से अधिक मामले लंबित पड़े हैं और ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में खाता व प्लॉट नंबर से जुड़ी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए उन्होंने विशेष शिविर लगाकर मामलों के त्वरित निपटारे का सुझाव दिया।

सामाजिक न्याय के मुद्दे पर जयराम महतो ने कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि वर्ष 1950 में इस समुदाय को कथित रूप से साजिश के तहत एसटी सूची से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने सुझाव दिया कि जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) के माध्यम से नई एथनोग्राफिक रिपोर्ट तैयार कराकर केंद्र सरकार को समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने की सिफारिश भेजी जाए।

इसके अलावा उन्होंने सूड़ी समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग उठाई। साथ ही केवट, मल्ला और निषाद समुदायों को भी अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

विधायक ने 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि राज्य गठन के 25 साल बाद भी इस विषय पर स्पष्ट नीति तय नहीं हो सकी है। उनके अनुसार स्थानीय नीति का उद्देश्य किसी वर्ग को बाहर करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की योजनाओं और अवसरों का लाभ किसे प्राथमिकता के आधार पर मिले।

प्रशासनिक सुधार की दिशा में सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मुख्यमंत्री सोशल मीडिया के माध्यम से आम लोगों से जुड़े रहते हैं, उसी तरह विभागों के सचिव और प्रधान सचिव भी इन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहें ताकि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सके। इसके अलावा उन्होंने 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष शिक्षकों को गृह जिले में स्थानांतरण की सुविधा देने और पेंशन निदेशालय में जल्द निदेशक की नियुक्ति करने की भी मांग की।