मंत्री सुदिव्य कुमार बोले- झारखंड की पहचान सिर्फ खनिज नहीं, इसकी प्राकृतिक खूबसूरती भी है

मंत्री सुदिव्य कुमार बोले- झारखंड की पहचान सिर्फ खनिज नहीं, इसकी प्राकृतिक खूबसूरती भी है

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 11, 2026, 3:00:00 PM

नई दिल्ली: झारखंड सरकार राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन और निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श 2026 के दूसरे दिन पर्यटन और औद्योगिक विकास पर व्यापक मंथन हुआ। डेस्टिनेशन झारखंड – पर्यटन निवेश एवं समावेशी विकास को गति विषय पर आयोजित इस सत्र में नीति-निर्माताओं, पर्यटन विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विकास साझेदारों ने हिस्सा लिया। बैठक में झारखंड को पूर्वी भारत का अग्रणी पर्यटन और निवेश केंद्र बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय संस्कृति तथा पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। परामर्श के दौरान बताया गया कि झारखंड तेजी से एक बहुआयामी और निवेश-उन्मुख पर्यटन राज्य के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2024 में राज्य में 5.85 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जिनमें 4.40 करोड़ श्रद्धालु शामिल रहे। इसे झारखंड में धार्मिक और सामान्य पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं का बड़ा संकेत माना गया। राज्य सरकार का मानना है कि पर्यटन केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सतत विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। झारखंड सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर निजी निवेश, संस्थागत वित्तपोषण और आधुनिक पर्यटन अवसंरचना के विकास का रास्ता आसान किया है। राज्य में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इको-टूरिज्म, वन्यजीव पर्यटन, साहसिक पर्यटन, वाटर स्पोर्ट्स, माइनिंग टूरिज्म और सामुदायिक आधारित जनजातीय पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026, होमस्टे नीति-2026, डिजिटल सिंगल विंडो पंजीकरण व्यवस्था और अन्य निवेशक-अनुकूल सुधारों के जरिए पर्यटन क्षेत्र को और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में काम कर रही है। बैठक में बताया गया कि PRASHAD और स्वदेश दर्शन जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही नए पर्यटन स्थलों का विकास, पर्यटक सुविधाओं का विस्तार और धार्मिक पर्यटन स्थलों के उन्नयन पर भी तेजी से काम चल रहा है। राज्य सरकार ने निवेशकों को होटल, रिसॉर्ट, रोपवे, स्काईवॉक, वाटर स्पोर्ट्स, फ्लोटिंग रेस्तरां, हाउसबोट, कैंपिंग साइट्स और अनुभवात्मक पर्यटन परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। सरकार का दावा है कि आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज और निवेश-अनुकूल नीतियों के जरिए झारखंड को पर्यटन निवेश का बड़ा केंद्र बनाया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार झारखंड की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, झारखंड की अपनी अलग पहचान और आकर्षण है। जो भी यहां आता है, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और आत्मीयता से हमेशा के लिए जुड़ जाता है। मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि प्रकृति ने झारखंड को केवल खनिज संपदा ही नहीं, बल्कि अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य का भी अमूल्य उपहार दिया है। हमारी इच्छा है कि झारखंड केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी पूरे देश में पहचाना जाए। झारखंड ने पर्यटन के लिए अपने द्वार खोल दिए हैं और हम पूरे देश के पर्यटकों का हार्दिक स्वागत करते हैं। सामुदायिक आधारित पर्यटन की चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि एक फाइव स्टार होटल प्रत्यक्ष रूप से करीब 200 लोगों को रोजगार देता है, जबकि यदि 100 होमस्टे विकसित किए जाएं और प्रत्येक परिवार में पांच सदस्य हों, तो करीब 500 लोगों की आजीविका सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही आकर्षक होमस्टे नीति-2026 लागू करेगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और झारखंड देश के प्रमुख होमस्टे पर्यटन गंतव्यों में शामिल होगा। राज्य सरकार का लक्ष्य झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध धार्मिक विरासत, जीवंत जनजातीय संस्कृति, आधुनिक पर्यटन अवसंरचना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के आधार पर राज्य को पूर्वी भारत का अग्रणी, सतत और निवेश-अनुकूल पर्यटन गंतव्य बनाना है।