टीजीटी भर्ती पर कानूनी संकट, 3,704 आरक्षित पद सरेंडर करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

टीजीटी भर्ती पर कानूनी संकट, 3,704 आरक्षित पद सरेंडर करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 22, 2025, 5:03:00 PM

झारखंड में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन संख्या 21/2016 के तहत आरक्षित वर्ग के 3,704 पदों को समाप्त (सरेंडर) किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है।

इस संबंध में लीला मुर्मू समेत अन्य अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता चंचल जैन के माध्यम से रिट याचिका दाखिल की है। याचिका में सरकार के निर्णय को संविधान के विपरीत, मनमाना और कानूनन असंगत बताया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संबंधित विज्ञापन के तहत आरक्षित श्रेणियों में बड़ी संख्या में योग्य और पात्र उम्मीदवार उपलब्ध थे, इसके बावजूद बिना किसी ठोस कारण या वैधानिक प्रक्रिया के हजारों पदों को सरेंडर कर दिया गया। इससे वे अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सोनी कुमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि चयन प्रक्रिया विज्ञापित पदों की सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए और यदि पात्र उम्मीदवार उपलब्ध हों तो पदों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

अधिवक्ता चंचल जैन ने तर्क दिया है कि आरक्षित वर्ग के 3,704 पदों को सरेंडर करना न केवल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के विरुद्ध है, बल्कि यह वैध अपेक्षा (Legitimate Expectation) के सिद्धांत का भी उल्लंघन करता है।

याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि सभी सरेंडर किए गए पदों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए और याचिकाकर्ताओं सहित सभी पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया जाए।

इस याचिका के दायर होने के बाद उन हजारों अभ्यर्थियों में एक बार फिर उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के पूर्ण होने की राह देख रहे हैं।