झारखंड में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया लगातार सुस्त होती जा रही है। सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय समय में आवेदन का निपटारा किया जाना अनिवार्य है, लेकिन कई जिलों में इसका पालन नहीं हो रहा। परिणामस्वरूप हजारों लोग अपनी जमीन से जुड़े जरूरी कार्यों के लिए महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
हाल के दिनों में कोडरमा जिले में प्रशासन ने लंबित मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। समीक्षा बैठक के दौरान निर्धारित अवधि में म्यूटेशन मामलों का निष्पादन नहीं करने पर पांच अंचल अधिकारियों पर कुल 2.65 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया। इस कार्रवाई के बाद वहां लंबित आवेदनों के निपटारे की रफ्तार बढ़ी। हालांकि राज्य के अधिकांश जिलों में ऐसी जवाबदेही तय नहीं होने के कारण स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
राजधानी रांची की तस्वीर भी राहत देने वाली नहीं है। जिले के विभिन्न अंचलों में कुल 16,255 म्यूटेशन आवेदन लंबित हैं। इनमें 2,022 आवेदन ऐसे हैं जिनमें कोई आपत्ति नहीं है, फिर भी 30 दिनों से अधिक समय से उनका निष्पादन नहीं हुआ। वहीं 825 मामले ऐसे हैं जिनमें आपत्ति दर्ज है और वे 90 दिनों से अधिक समय से लंबित पड़े हैं।
अगर अंचलवार स्थिति देखें तो नामकुम सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, जहां 3,108 आवेदन लंबित हैं। इसके बाद कांके (2,969), नगड़ी (1,787), रातू (1,159) और बड़गाईं (1,048) का स्थान है। बिना आपत्ति वाले 30 दिन से अधिक पुराने मामलों में भी नामकुम सबसे आगे है, जहां 847 आवेदन निर्धारित समय सीमा पार कर चुके हैं। इसके बाद बुंडू (176), मांडर (162), इटकी (130) और बुढ़मू (114) का नंबर आता है।
आपत्ति वाले 90 दिन से अधिक पुराने मामलों की बात करें तो भी नामकुम की स्थिति सबसे खराब है। यहां 180 आवेदन तय समय से काफी अधिक अवधि से लंबित हैं। इसके बाद बड़गाईं (136), ओरमांझी (120), कांके (106) और रांची शहर अंचल (103) में सबसे ज्यादा पुराने मामले दर्ज हैं।
हालांकि कुछ अंचलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। सोनाहातू, सिल्ली, राहे और खलारी ऐसे क्षेत्र हैं जहां 90 दिनों से अधिक समय से आपत्ति वाले कोई भी म्यूटेशन आवेदन लंबित नहीं हैं। इनमें सोनाहातू सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां कुल चार आवेदन ही लंबित हैं।
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल लंबित आवेदन | 16,255 |
| 30 दिन से अधिक लंबित (बिना आपत्ति) | 2,022 |
| 90 दिन से अधिक लंबित (आपत्ति सहित) | 825 |
सबसे अधिक कुल लंबित आवेदन
| क्रम | अंचल | लंबित आवेदन |
|---|---|---|
| 1 | नामकुम | 3,108 |
| 2 | कांके | 2,969 |
| 3 | नगड़ी | 1,787 |
| 4 | रातू | 1,159 |
| 5 | बड़गाईं | 1,048 |
30 दिन से अधिक बिना आपत्ति वाले सबसे अधिक लंबित आवेदन
| क्रम | अंचल | लंबित आवेदन |
|---|---|---|
| 1 | नामकुम | 847 |
| 2 | बुंडू | 176 |
| 3 | मांडर | 162 |
| 4 | इटकी | 130 |
| 5 | बुढ़मू | 114 |
90 दिन से अधिक आपत्ति वाले सबसे अधिक लंबित आवेदन
| क्रम | अंचल | लंबित आवेदन |
|---|---|---|
| 1 | नामकुम | 180 |
| 2 | बड़गाईं | 136 |
| 3 | ओरमांझी | 120 |
| 4 | कांके | 106 |
| 5 | रांची शहर | 103 |
आंकड़े बताते हैं कि सेवा गारंटी अधिनियम लागू होने के बावजूद कई अंचलों में समयबद्ध तरीके से म्यूटेशन मामलों का निपटारा नहीं हो रहा है। ऐसे में लोगों को जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, उत्तराधिकार और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोडरमा की तरह जवाबदेही तय करने और नियमित समीक्षा की व्यवस्था लागू की जाए तो लंबित मामलों में तेजी से कमी लाई जा सकती है।