झारखंड हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) से जुड़े मामले में आरोपी कुंदन कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत होते हों और उनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों, तब केवल मुकदमे में संभावित देरी को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि कुंदन कुमार पर लगाए गए आरोप UAPA की धारा 43D(5) के तहत आते हैं, जो अत्यंत गंभीर श्रेणी में माने जाते हैं। जांच एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य इस मामले में उसके खिलाफ मजबूत आधार प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि कुंदन कुमार की भूमिका अन्य सह-आरोपियों से भिन्न है। जांच के अनुसार जिस फ्लैट से उसकी गिरफ्तारी हुई थी, वहां कथित रूप से आतंकियों को शरण दी गई थी और उसी स्थान से बड़ी मात्रा में हथियार तथा गोला-बारूद भी बरामद किया गया था। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह के मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत को बताया कि मामले की सुनवाई को गति देने के लिए गवाहों की संख्या कम की गई है। पहले जहां 345 गवाह प्रस्तावित थे, वहीं अब यह संख्या घटाकर 129 कर दी गई है। एजेंसी ने यह भी जानकारी दी कि अब तक 26 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कुंदन कुमार की आपराधिक अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत के पहले से दिए गए आदेश को बरकरार रखा।